श्री गणेशाय नम:
Devotional Thoughts
प्रभु प्रेरणा से चन्द्र शेखर कर्वा द्वारा संकलित
प्रभु कृपा के दर्शन Visualizing GOD's Kindness
यह स्तम्भ इसलिए शुरू किया जा रहा है क्योंकि हमें कभी कभी ऐसा लगता है कि प्रभु कृपा तो इतिहास के भक्त चरित्र जैसे श्री सुदामाजी, श्री नरसीजी, भगवती द्रौपदी, भगवती मीराबाई, श्री प्रह्रलादजी, श्री ध्रुवजी, श्री गजेन्द्र जी के ही जीवन में देखने को मिलती है

मैं दृढता से मानता हूँ कि इन भक्त श्रेष्ठों के जीवन तो प्रभु कृपा से ओत प्रोत रहे ही हैं पर वर्तमान के कलियुग के दोषों से भरपूर साधारण मनुष्यों पर भी प्रभु कृपा निरंतर बरसती है क्योंकि -

1 जैसे श्रीसूर्यनारायण प्रभु पूरे विश्व के एक-एक कोने को प्रकाशित करते हैं, प्रकाश से कोई भी अछूता नहीं है, वैसे ही प्रभु कृपा से भी कोई भी जीव अछूता नहीं है ( यह हमारी कमजोरी है कि उस कृपा के हम दर्शन नहीं कर पाते और और उस कृपा को अपनी स्वार्जित उपलब्धि या भाग्य मान कर जीवन में अपनी सामर्थ्य का अंहकार ले आते हैं और अपना पतन करवा लेते हैं ) ।

2 प्रभु तो अमावस्या की काली रात में कोयले की खान में भी चलने वाली काली नन्हीं चींटी को भी देखते हैं, उसकी पुकार भी सुनते हैं और उस पर कृपा बरसाते हैं । काली रात ( अमावस्या की ) में काली जगह ( कोयले की खान में ) काले प्राणी ( नन्हीं चींटी ) को देखने और उसकी मदद करने का सामर्थ्य प्रभु के अलावा क्या है किसी में ?

प्रभु कृपा तो कलियुग के दोषों से भरपूर साधारण मनुष्यों पर आज भी होती ही रहती है पर हमें उसके दर्शन करने की कला नहीं आती । प्रभु अनुकम्पा से जिन्हें यह कला आती हो, वे अपने जीवन में प्रभु कृपा के दर्शन के अपने अनुभव हमें भेज सकते हैं kripa.devotionalthoughts[@]gmail.com पर ।

इस स्तम्भ के लिए उपयुक्त पाये जाने पर, आपके नाम के साथ उन्हें यहां प्रकाशित किया जायेगा ।

चार बातें कहना चाहूँगा –

पहली बात, हमारे जीवन की हर अनुकूलता प्रभु कृपा ही तो है । हमारे जीवन की हर प्रतिकूलता, जिसका हमने सामना किया, वह प्रभु कृपा के बल के कारण ही तो किया । प्रभु कृपा न होती तो प्रतिकूलता हमारे लिए असहनीय हो जाती ।

दूसरी बात, जितना हम अपने जीवन में घटी घटना को प्रभु कृपा से जोड़कर देखना सीखेंगे, उतना ही हमें जीवन में प्रभु कृपा के दर्शन होने लगेंगे । जीवन में प्रभु कृपा का जैसे जैसे दर्शन बढ़ता जायेगा, वैसे वैसे हम प्रभु के समीप पहूँचते चले जायेंगे ।

तीसरी बात, जब हम किसी घटना में प्रभु कृपा देखना सीख लेते हैं तो हमारे अंहकार का क्षय होता है क्योंकि अब तक उस घटना को हम अपनी बुद्धिबल, धनबल, शक्तिबल, कुटुम्ब–समाज बल से जोड कर देख रहे थे । उदाहरण स्वरूप हमें प्रधानमंत्री सहायता कोष से सहयोग के तौर पर एक बड़ी रकम का चैक डाकिये ने पत्र रूप में लाकर दिया । तो क्या हम डाकिये को उस सहायता का श्रेय देते हैं ? नहीं, हम मात्र उसे डाक पहूँचाने के लिए साधारण सा धन्यवाद देते हैं, पर सच्ची कृतज्ञता रकम भेजने वाले के प्रति होती है । क्योंकि हमें पता है की डाकिया तो मात्र माघ्यम बना है, पर सहयोग भेजने वाला तो कोई दूसरा है । पर हम जीवन में अक्सर इतनी बड़ी भूल कर जाते हैं की जीवन में सभी तरह के और हर समय सहयोग भेजने वाले महाप्रभु के कृपा के दर्शन करने से हम चूक जाते हैं और प्रभु द्वारा सहायता पहूँचाने के लिए निमित / माध्यम बने पात्र को हम असली सहयोगी मान बैठते हैं । यह तो ठीक वैसे ही हुआ जैसे हम डाकिये को अपने बांहो में भर कर उसके प्रति कृतज्ञता माने और रकम भेजने वाले को एक छोटा सा औपचारिक धन्यवाद देकर इतिश्री कर लें । होना उलटा चाहिए, माध्यम बाने व्यक्ति को छोटा सा औपचारिक धन्यवाद और भेजने वाले प्रभु के प्रति ह्रदय की गहराई से कृतज्ञता ज्ञापन ।

किसी भी उपलब्धि को जब तक हम अपने बुद्धिबल, धनबल, शक्तिबल, कुटुम्ब–समाज बल से जोड़कर देखेंगे, उतना ही हमारा अंहकार पनपेगा । जीवन की किसी भी उपलब्धि को प्रभु से जोड़कर देखेंगे तो तुरंत हमारे अंहकार का क्षय होने लगेगा । जितना-जितना जीवन में अंहकार का क्षय होता चला जायेगा, हम प्रभु के उतने-उतने करीब पहूँचते चले जायेंगे ।

चौथी बात, जितना-जितना हम प्रभु कृपा के दर्शन करना अपने जीवन में बढ़ाते चले जायेंगे, उतना-उतना प्रभु के लिए आस्था और भक्ति बढ़ती चली जायेगी ।

इस मंच पर खुलकर अपने और अपने परिवार के सदस्यों पर हुये प्रभु कृपा के अनुभव बांटें ।

इसलिए आपका स्वागत है अपने और अपने परिवार के सदस्यों पर हुये प्रभु कृपा के अनुभव बाँटने के लिए । दूसरों को प्रभु कृपा के दर्शन करवाने पर आपको आन्तरिक शान्ति मिलेगी, ऐसा करने पर स्वंय के अंहकार का क्षय होगा । दूसरों के लिए, आपकी बात प्रेरणा बनेगी और वे भी अपने जीवन में प्रभु कृपा के दर्शन का एंव प्रभु कृपा को अर्जित करने का प्रयास करेंगे । इससे सबका भला ही भला होगा । क्योंकि जो भी जैसे भी प्रभु से जुडता है, उसका भला होना उसी समय सुनिश्चित हो जाता है ।

प्रभु के बड़े चमत्‍कार भी "प्रभु कृपा के दर्शन" हैं और जीव पर दैनिक जीवन में छोटे छोटे कृपा प्रसंग भी "प्रभु कृपा के दर्शन" हैं । क्‍योंकि प्रभु कृपा कभी छोटी या बड़ी नहीं होती, कृपा तो कृपा होती है । इसलिए दोनों तरह के प्रसंग को इस स्‍तम्‍भ में स्‍थान दिया जायेगा । वैसे भी जीवन में एक बड़े चमत्‍कार की जगह दैनिक जीवन में छोटे छोटे कृपा प्रसंग को मैं ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण मानता हूँ क्‍योंकि यह छोटे छोटे कृपा प्रसंग प्रभु सानिध्‍य की हमारे जीवन में लगातार अनुभूति कराते रहते हैं । उद्धारण स्‍वरूप बचपन में हुआ एक बड़ा चमत्‍कार को हम भूल भी सकते हैं, पर दैनिक जीवन में छोटे छोटे प्रसंग में प्रभु कृपा के दर्शन करने की क्षमता अगर आ गई तो पल पल प्रभु की अनुभूति हमारे हृदयपटल पर होने लगेगी ।

प्रभु से जुडने के इस प्रयास में अपना अनुभव इस मंच पर बांटकर यथाचित सबको प्रेरणा देंवे -

(क) किसी बिमारी, दुर्घटना, आपदा - विपदा एंव अन्य प्रतिकूलता के वक्त प्रभु द्वारा भेजे मदद को याद कर उसमें प्रभु कृपा के दर्शन करवाते हुये अपना संस्म‍रण हमें भेजें ।

(ख) ऐसे ही अनुकूलता के वक्त, आपके प्रयासों से बहुत ज्यादा, आपकी अपेक्षा से अधिक प्रभु से मिलने पर अपने प्रभु कृपा के दर्शन किये हो तो अपना संस्म‍रण हमें भेजें ।

(ग) कभी आपके मन में प्रभु ने प्रेरणा जाग्रत करके, आपको निमित बनाकर, प्रभु ने आपके माध्यम से किसी को सहयोग भेजा हो, तो प्रभु प्रेरणा के दर्शन करवाते हुये अपना संस्म‍रण हमें भेजें ।


एक ही परमपिता परमेश्वर के अंश होने के कारण, सभी धर्मो के लोगों का अपने जीवन में घटित प्रभु कृपा के अनुभव बाँटने हेतु इस मंच पर स्वागत है । आप हमें हिन्दी अथवा अंग्रजी, दोनों में से किसी भी भाषा में अपना अनुभव भेज सकते हैं ।


1. लेख के चुनाव के मापदण्ड एंव प्रक्रिया: उसी आलेख का चुनाव किया जायेगा जिसमें प्रभु की कृपा और दया का स्पष्ट दर्शन होता हो । आपके द्वारा आपके जीवन के प्रसंग में प्रभु कृपा और दया का दर्शन करवा पाना ही आपकी प्रविष्टि का “प्रभु कृपा के दर्शन“ स्तम्भ में चुनाव के लिए एकमात्र मापदण्ड होगा ।

चयनित होने पर, आप द्वारा ईमेल से भेजे आलेख में जरूरतनुसार व्याकरण एंव वर्णयोग की जांच करेंगे । संपादन कर उसका प्रिन्ट एंव डाक टिकट लगा वापसी का एक पंजीकृत लिफाफा आपके डाक के पते पर पंजीकृत डाक से आपको भेजें देंगे । आप आपना हस्ताक्षर करके वापस उस प्रिन्ट को हमें लौटा देवें । यह सत्यापन और संवेक्षा के लिए हमारे प्रयास का एक हिस्सा है ।

हस्ताक्षर होकर लौटने पर, उसे इस वेबसाईट के स्तम्भ “प्रभु कृपा के दर्शन“ में प्रकाशित कर दिया जायेगा और इसकी सुचनार्थ आपको ईमेल एंव एस.एम.एस पर आपके आलेख के प्रकाशन की इत्तला भेज दी जायेगी ।


2. अस्वीकृति के कारण : अगर आपके जीवन के प्रसंग में ज्यादा संसारिक विवरण एंव मानवीय क्षमता को केंद्र बिंदु करता हुआ आपका आलेख पाया गया और प्रभु कृपा और दया का यथाचित दर्शन आप नहीं करवा पायें, तो उसे प्रकाशन हेतु स्वीकार नहीं किया जायेगा । इसके अलावा अन्य कारणों से भी प्रविष्टि प्रकाशन हेतु अमान्य हो सकती है । अस्वीकृत हाने पर इसकी सुचना के लिए कोई ईमेल अथवा एस.एम.एस नहीं भेजा जायेगा । इस बाबत पूछताछ के लिए कोई पत्राचार या ईमेल न करें । प्रविष्टि के चुनाव की प्रक्रिया में वेबसाईट के संचालक का निर्णय अंतिम और सभी के लिए मान्य होगा एंव अस्वीकार्यता का कारण बताना कदाचित जरूरी नहीं होगा ।


3. हिन्दी युनीकोड की उपलब्धता नहीं होने पर : यदि आप अपना आलेख हिन्दी में ईमेल करना चाहते हो, पर आपके कंप्यूटर में हिन्दी युनीकोड फोन्ट उपलब्ध न हो तो आप हमारा डाक का पता ( अंग्रेजी में ईमेल भेजकर ) पूछ सकते हैं जिससे आप अपना हस्त लिखित या टाईप किया हुआ हिन्दी का आलेख डाक द्वारा भेज सकें । प्रविष्टि का चुनाव होने पर, हम उसे हिन्दी युनीकोड में परिवर्तित कर जरूरतनुसार संशुद्धि एंव संपादन कर उसका प्रिन्ट पंजीकृत डाक से आपको भेज देंगे जिसका पूरा ब्योरा क्रमांक 1 पर विस्तार से दिया गया है ।


4. न्या‍याधिकार क्षेत्र : क्योंकि यह प्रभु का कार्य है, इसलिए सत्यापन और संवेक्षा हेतु पूरा प्रयास किया जायेगा । इसलिए किसी भी कानूनी समस्या की हम पूर्व कल्प‍ना नहीं करते । फिर भी किसी बहुत असम्भाव्य परिस्थिति में अगर कोई कानूनी समस्या हुई, तो उसका न्या‍याधिकार क्षेत्र सिर्फ और सिर्फ जयपुर होगा ।


।। श्री कृष्णं वन्दे जगद्‌गुरूम्‌ ।।

> > > चन्द्रशेखर कर्वा

The reason behind starting this forum is because sometimes we do feel that GOD’s kindness on devotees are only reflected in mythological tales and do not happen in real life today. Indian mythology contains innumerous tales of GOD’s kindness bestowed on great devotees like Sri Sudama ji, Sri Narsi ji, Bhagwati Draupadi, Bhagwati Meerabai, Sri Prahlad ji, Sri Dhruv ji, Sri Gajendra ji (the elephant).

I very firmly believe that the lives of these great devotees were truly filled with umpteen instances of GOD’s kindness. But in the present era (Kalyug) too, human being, with all modern day evils attached to him, still receive shower of GOD’s kindness.

1. Because just like the SUN GOD lights each & every corner of the world without discrimination, ALMIGHTY GOD also showers kindness on mankind without discrimination. (It is our fault that we do not visualize such kindness and instead take it as our self-earned achievement or fortune. Thus we boast of our capabilities & capacities giving birth to arrogance, which leads to our downfall.)

2. Because GOD, the ALMIGHTY can even see & hear the misery of an ant inside a coal mine on a dark night and showers it with HIS kindness. Who else, apart from ALIMGHTY GOD, can see & help the Black ant inside a Black coal mine on a Blackest dark night.

GOD’s kindness is showered even in present era (Kalyug) on ordinary persons filled with all evils, but we do not know the art to visualize it. By virtue of GOD’s blessing, whosoever knows this art of visualizing GOD’s kindness in incidents of his life, can email us his memoirs on kripa.devotionalthoughts[@]gmail.com

If found suitable for this forum, they will be published on this website with your name.

I wish to put forward four points:

Firstly, whatever favorable is in our life is only due to GOD’s kindness. Whatever unfavorable we have boldly encountered in our life, was only done on strength of GOD’s kindness. Had it not been for GOD’s kindness, the unfavorable situation of our life would have magnified to a point of unbearableness.

Secondly, the more we start visualizing all events with GOD’s kindness, the more we are able to experience GOD’s kindness in it. The more we keep on experiencing GOD’s kindness in our life, the more we reach closer to ALMIGHTY GOD.

Thirdly, when we learn to visualize GOD’s kindness in any incident, our arrogance gets washed away because until that time we had merited that incident to have happened because of our wisdom, money, power and help from family & society. Let us take the example of a postman who delivers a letter to us containing a big aid in form of cheque sent by Prime Minister Relief Fund. Do we credit the postman for the amount so received ? No, we just offer him formal thanks for being a via media for delivery of the letter but offer our sincere gratitude only to the sender of the cheque. Because we know that the postman was only a via media, whereas the real help came from someone else. But we generally make a blunder in our real life, when we forget to see the hidden hand of ALMIGHTY GOD and forget to visualize HIS kindness behind all forms of help, at all times. A bigger blunder is when we envisage the via media to be the real helper. It is just like embracing the postman with a heartfelt gratitude and offer a formal thank to the real sender. Whereas it should have been the other way round, a formal thank to the postman and deepest heartfelt gratitude from the bottom of our heart for ALMIGHTY GOD.

Till we continue to merit all incidents to our wisdom, money, power and help from family & society, we will continue to pamper our arrogance. But the moment we start to visualize GOD’s kindness in that incident, our arrogance starts getting washed away. The more our arrogance gets washed, the more we reach closer to ALMIGHTY GOD.

Fourthly, the more we increase our effort in visualization of GOD’s kindness in our life, the more we are blessed with a reciprocate increase in our faith & devotion towards ALMIGHTY GOD.

We request you to share your views & also the views of your family members openly & unhesitatingly in this forum.

Therefore you are invited to share your & your family’s experience of GOD’s kindness. By sharing your experience, and enabling other to visualize GOD’s kindness, you will get inner tranquility, as the arrogance will get washed away. By sharing your experience, you will inspire others to visualize and to seek GOD’s kindness in their lives. All will be blessed. Because when anyone, by any means try to unite with ALMIGHTY GOD, his well being is immediately assured at that very moment.

Big miracles in our life are reflection of "GOD's kindness", even smaller instances in our routine life are also reflection of "GOD's kindness". GOD's kindness cannot be categorised as big or small because kindness in whatsoever form is kindness alone and nothing else. Therefore we will include memoirs containing both, big miracles and small instances in this forum. I personally feel that small instances of GOD's kindness in our routine life is better than one big miracle in our life. Because small instances of GOD's kindness constantly keeps reminding us of the divine presence. For example, we may tend to forget a big GOD miracle of our childhood period. But if we master the art to see GOD's kindness in small events / instances in our routine life, we would be able to visualize GOD's presence at bottom of our heart during all times.

In our humble effort to unite with the ALMIGHTY, please feel free to share your experience in this forum, which can inspire others -

(a) Any illness, accident, other calamity and unfavorable instances of your life wherein your received help from ALMIGHTY GOD, may be sent as memoirs, with your visualization of GOD’s kindness in the incident.

(b) Likewise, in favorable times, when you did receive more than expected, more than anticipated from ALMIGHTY GOD, such experience may also be send as memoirs, with your visualization of GOD’s kindness in it .

(c) At any point of time in your life, if MERCIFUL LORD has inspired you for helping someone, or have made you the medium for extending help to someone, such experience may also be send as memoirs, with your visualization of GOD’s kindness in it .


As we all belong to the one & only GODFATHER, therefore people from all religion are invited to share their experience, in this forum, of their visualization of GOD’s kindness in their life. You can send us your memoirs in either of the two languages, Hindi or English.

1. Our selection criteria & procedure: Memoirs which best reflects your experience of the kindness & mercy of ALMIGHTY GOD in your life will be selected. Visualization of kindness & mercy of ALMIGHTY GOD in the particular event in your life is the only criteria for selection of entries to this section “PRABHU KRIPA KE DARSHAN”.

Once selected, we will take a printout of your email, after making grammatical & spelling corrections, if necessary, and editing where ever necessary. We will send this final printout to your address by Regd Post alongwith a pre-stamped Registered Envelope for returning back the printout to us, duly signed by you. This will serve our authentication & due diligence purpose.

After receiving back the above, it will be published on this website under section “ PRABHU KRIPA KE DARSHAN” and a confirmatory email & sms will be sent to you for confirming that your memoirs is published & is live on website.

2. Non-selection criteria: If your memoirs contain only earthly descriptions and its focus is plainly on human ability in a particular event of your life without your visualization of ALMIGHTY GOD’s kindness & mercy in it, then it will not be considered. There are other rejection criteria too. No email or sms will be sent to inform about rejection. No correspondence, email will be entertained in this regard. The decision of the administrator of the website will be final & binding to all and no reasons will be assigned for rejection.

3. Non-availability of Hindi Unicode at your end: If you wish to send your memoirs in Hindi and are not able to sent the same on email due to non availability of Hindi Unicode on your computer, you may please seek our postal address (by sending us a email in English) so as to enable you to send your handwritten or typed matter in Hindi by post. If selected, we will convert it in Unicode (Hindi) and send you the printout by incorporating corrections & editing, if any, by Regd Post as more elaborately mentioned at Point no 1 hereinabove.

4. Jurisdiction: Since it is GOD’s work & therefore we take all pains for proper authentication & due diligence. Therefore we do not anticipate any legal problem. But in the highly unlikely event of any legal complication, it will be purely subject to Jaipur jurisdiction only.


।। SHRI KRISHNAM VANDE JAGATGURUM ।।

> > > ChandraShekhar Karwa


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