श्री गणेशाय नम:
Devotional Thoughts
Devotional Thoughts Read Articles सर्वसामर्थ्यवान एंव सर्वशक्तिमान प्रभु के करीब ले जाने वाले आलेख, मासिक ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में )
Articles that will take you closer to OMNIPOTENT & ALMIGHTY GOD, monthly (in Hindi & English)
Precious Pearl of Life श्रीग्रंथ के श्लोको पर छोटे आलेख ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
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Feelings & Expressions प्रभु के बारे में उत्कथन ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
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Visualizing God's Kindness वर्तमान समय में प्रभु कृपा के दर्शन कराते, असल जीवन के प्रसंग
Real life memoirs, visualizing GOD’s kindness in present time
Words of Prayer प्रभु के लिए प्रार्थना, कविता
GOD prayers & poems
प्रभु प्रेरणा से संकलन द्वारा चन्द्रशेखर करवा
Serial No. Post
71 Real-life memoir by Mr Deendayal Agarwal titled प्रभु द्वारा यात्रा में रक्षा
Indexed as (1) TRAVEL MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how GOD helps when no one else is there to help. When we sincerely seek GOD in distress, GOD immediately comes to our rescue.

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प्रभु द्वारा यात्रा में रक्षा

बात सन 2012 की है । मैं सत्संग में भाग लेने ट्रैन से दिल्ली से हरिद्वार जा रहा था क्योंकि आध्यात्म मुझे प्रिय है और सत्संग में मेरी विशेष रुचि रहती है ।

मुझे ट्रैन में एसी कोच में साइड लोअर बर्थ मिली थी । अचानक काफी संख्या में छात्रों की भीड़ एसी कोच जो की आरक्षित था उसमें चढ़ गई । वे छात्र सभी लोगों को हटाकर सीट पर बैठने लगे ।

मेरी सीट पर भी दो छात्र जबरन बैठने की कोशिश करने लगे । थोड़े गुस्से में मैं बोल पड़ा कि यह आरक्षित सीट है इसलिए जबरन मेरी सीट पर क्यों बैठ रहे हो । वे छात्र मुझे धमकी देकर चले गए कि हमें बैठने नहीं दे रहे हो तो हम अभी मजा चखाते हैं । ट्रैन में बैठे अन्य सहयात्री ने भी मुझे टोका कि छात्रों से उलझना ठीक नहीं है ।

10-15 मिनट बाद ट्रैन की चेन पुलिंग हुई और बहुत सारे छात्र हमारे कोच में आ धमके । बचाने वाला कोई नहीं था । न टीटी था, ना रेलवे पुलिस थी । अब बचाने वाले सिर्फ प्रभु ही थे और मैं मन ही मन प्रभु का नाम लेने लगा कि इस विपत्ति में मेरी रक्षा करें और छात्रों से मुझे बचायें । संपादक टिप्पणी - जिस परिस्थिति में कोई बचाने वाला नहीं होता उस परिस्थिति से भी हमें प्रभु बचा कर ले जाते हैं ।

मेरे आश्चर्य की सीमा न रही जब मैंने देखा कि वे दोनों छात्र जिनसे मेरी झड़प हुई थी और जिन्होंने मुझे सबक सिखाने की धमकी दी थी वे मुझे खोजते हुए दो-तीन बार मेरे सामने से गुजरे पर बैठे हुये वे मुझे पहचान न पाये । वे कहते हुये जा रहे थे कि वह व्यक्ति कहाँ है जिसने हमें बैठने नहीं दिया पर दृष्टिभ्रम के कारण वे मुझे पहचान नहीं पाये । इस तरह मेरे प्रभु ने मुझे बचा लिया ।

मैंने प्रभु को धन्यवाद दिया कि वहीं बैठे होने के बावजूद भी वे दोनों छात्र मुझे नहीं देख पाये अन्यथा कुछ भी अनहोनी हो सकती थी । प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन मैंने इस प्रसंग में किये । संपादक टिप्पणी - सदैव विकट से विकट परिस्थिति में भी प्रभु को नहीं भूलना चाहिए और अपनी रक्षा के लिए प्रभु से ही सच्चे हृदय से प्रार्थना करनी चाहिए ।


दिनदयाल अग्रवाल
भीलवाड़ा (राजस्‍थान)


नाम / Name : दिनदयाल अग्रवाल
प्रकाशन तिथि / Published on : 30 जनवरी 2018

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 40 वर्ष की है । मैं भीलवाड़ा में कपड़े का व्यवसाय करता हूँ जिसको मैंने शुरू किया था ।
सत्संग मुझे प्रिय है । तीर्थों के दर्शन करने में मेरी विशेष रूचि है ।
मैंने जीवन में सदैव प्रभु कृपा का अनुभव किया है ।
72 Real-life memoir by Mrs Priya Agarwal titled संकट बेला में प्रभु की कृपा
Indexed as (1) MARRIAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how in a disturbed situation the parents seeks the help of GOD for the marriage of their daughter. With the blessing of GOD the daughter now leads a happy married life.

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संकट बेला में प्रभु की कृपा

प्रभु की कृपा जीवन में कैसे काम करती है यह मेरी बेटी के प्रसंग में साक्षात देखने को मिलता है ।

मेरी बेटी का अब विवाह हो चुका है और वह प्रभु की कृपा से अपने ससुराल में बहुत सुखी है । पर विवाह के पूर्व की घटना मैं बताना चाहती हूँ जब वह परेशानी में थी ।

मेरी बेटी ने विवाह से दो-तीन वर्ष पूर्व ही पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि उसकी तबीयत खराब रहने लग गई थी । वह इतनी बीमार रहने लग गई कि बीमारी के कारण वह लगभग अवसाद में चली गई । वह विवाह लायक हो चुकी थी पर परिवार वाले उसकी स्थिति देखते हुए विवाह को टालने की बात करने लगे । सबको लगता था कि वह अपने ससुराल में सामंजस्य नहीं बैठा पायेगी और उसका विवाहित जीवन बिगड़ जायेगा ।

पर जब बेटी विवाह लायक हो जाती है तो उसके विवाह की चिंता माता-पिता को रोजाना सताने लगती है । हमारे साथ भी ऐसा ही हो रहा था । फिर हमने वह किया जो हमें करना चाहिए था । हमने प्रभु की शरणागति ली और अपनी बेटी का पूरा दायित्व प्रभु पर छोड़ दिया । संपादक टिप्पणी - जब परिस्थिति हमारे नियंत्रण से बाहर होती है तो भी वह प्रभु के पूर्ण नियंत्रण में होती है इसलिए प्रभु की शरणागति लेकर जीवन में सदैव प्रभु को आगे कर देना चाहिए ।

प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन हुये जब कुछ ही दिनों में एक संबंध आया । ससुराल अनुकूल था, लड़का सुलझा हुआ था इसलिए प्रभु द्वारा भेजा हुआ है ऐसा मानकर हमने संबंध को स्वीकार कर लिया ।

बेटी का विवाह धूमधाम से हुआ और आज वह अपने ससुराल में बहुत अच्छी तरह से सामंजस्य बैठा कर बहुत सुखी है । विवाह के बाद प्रभु की कृपा से उसकी तबीयत भी एकदम ठीक रहने लग गई ।

हमारी बहुत बड़ी चिंता का प्रभु कृपा के कारण निवारण हो गया । प्रभु कृपा के बिना ऐसा होना कदापि संभव नहीं था । संपादक टिप्पणी - प्रभु कृपा के बिना कभी प्रतिकूल परिस्थिति अनुकूल नहीं हो सकती । इसलिए जीवन में प्रभु की शरणागति लेकर प्रभु कृपा अर्जित करने का प्रयास करना चाहिए जैसा की इस दम्‍पति ने किया ।


प्रिया अग्रवाल
जोधपुर (राजस्‍थान)


नाम / Name : प्रिया अग्रवाल
प्रकाशन तिथि / Published on : 19 फरवरी 2018

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 45 वर्ष की है और मेरा निवास जोधपुर में है । हमारे हैड़ीक्राफट का व्‍यापार है और शहर में दो शोरूम है ।
परिवार में सासुजी, पति और एक पुत्री है जिसका विवाह हो चुका है ।
प्रभु में मेरी बहुत आस्था है और प्रभु श्री लड्डूगोपालजी की सेवा में अपने हाथों से करती हूँ ।
73 Real-life memoir by Mr Raghunandan Mantri titled दुर्घटना से प्रभु ने बचाया
Indexed as (1) PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how the inner voice of GOD saves a person from a train accident. Great is the Saviour and great are His ways to save.

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दुर्घटना से प्रभु ने बचाया

घटना सन 1970 की है । मैं किसी कार्य से कोलकाता गया हुआ था । उसी समय श्रीजगन्नाथपुरी धाम में प्रभु की रथयात्रा का उत्सव आ रहा था जिसमें शामिल होने की प्रबल इच्छा मेरे मन में हुई । मैंने श्रीजगन्नाथपुरी धाम जाने के लिए कोलकाता से रेल का आरक्षण करवा लिया ।

फिर पता नहीं क्या हुआ कि एकाएक मन में प्रेरणा हुई कि रेल से नहीं जाना है । रात्रि में भी सपने में ऐसा लगा कि कोई प्रेरणा दे रहा है कि जिस रेल से आरक्षण करवाया है उसमें नहीं जाना है । मैंने तत्काल प्रेरणा को प्रभु आदेश मानते हुए सुबह ही रेल की टिकट कैंसिल करवा लिया और उसकी जगह हवाई जहाज की कटक तक की टिकट बनवा ली । संपादक टिप्पणी - जब हमारी प्रभु में पूर्ण आस्‍था होती है तो प्रभु हमारी रक्षा का दायित्‍व सहर्ष उठाते हैं और प्रेरणा देकर हमें संकट से बचाते हैं । साथ के लोग नाराज भी हुए कि अचानक ऐसी क्या बात हो गई कि रेल आरक्षण रद्द करवाकर हवाई जहाज का आरक्षण करवाया । पर मैंने अपने मन की प्रेरणा को प्रभु का शुभ आदेश मानते हुए बिना किसी हिचक के ऐसा किया ।

हवाई जहाज से मैं कटक पहुँचा और वहाँ से टैक्सी लेकर श्रीजगन्नाथपुरी धाम पहुँचा । प्रभु की एक और कृपा हुई क्योंकि श्रीजगन्नाथपुरी धाम में रथयात्रा के उत्सव के अवसर पर रुकने का स्थान मिलना लगभग असंभव होता है । मैंने तत्काल प्रोग्राम बनाया था एवं पहले से कोई होटल या धर्मशाला में आरक्षण नहीं करवाया था । प्रभु ने कृपा की और टैक्सी में कटक से जाते समय एक पुलिस अफसर ने लिफ्ट मांगी तथा श्रीजगन्नाथपुरी धाम पहुँचकर किसी होटल या धर्मशाला में जगह नहीं मिलने पर उन्होंने मदद की और अपनी जान पहचान से एक लॉज में एक बहुत अच्छा कमरा मुझे दिलवा दिया । संपादक टिप्पणी - बिना किसी पूर्व आरक्षण के इतने बड़े रथयात्रा के उत्‍सव में भी प्रभु ने कृपा करके किसी अनजान व्‍यक्ति को निमित बनाकर र्तीथ में रूकने की सुचारू व्‍यवस्‍था करवाई ।

फिर मैंने खबर में सुना कि जिस ट्रैन से मैंने जाने के लिए शुरू में आरक्षण कराया था वह ट्रैन दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसके सात डब्‍बे पुल के ऊपर से नदी में गिर गए तो मुझे साक्षात अनुभव हुआ कि मेरे प्रभु ने प्रेरणा देकर मुझे उस ट्रैन में जाने से और दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाया । मैंने अपने इष्‍टदेव श्री सालासरजी के श्रीहनुमानजी भगवान का स्मरण किया और भाव विभोर होकर उन्हें धन्यवाद दिया कि उनकी कृपा से ही मेरी रक्षा हुई । संपादक टिप्पणी - संकट से बचने के बाद हमारा सबसे पहला कर्तव्य यही होना चाहिए कि प्रभु के प्रति कृतज्ञता का भाव तत्‍काल हमारे हृदय में आये जैसा यहाँ देखने को मिलता है ।


रधुनंदन मंत्री
किशनगंज (बिहार)


नाम / Name : रधुनंदन मंत्री
प्रकाशन तिथि / Published on : 20 फरवरी 2018

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 78 वर्ष की है और मैं किशनगंज बिहार का रहने वाला हूँ ।
मैं एक स्थानीय मंदिर के ट्रस्ट से जुड़ा हुआ हूँ और हमारा ट्रस्ट हर वर्ष प्रभु कथा का आयोजन मंदिर प्रांगण में करवाता है । मेरी सत्संग में रूचि है और मैं श्रावण मास में स्वर्गाश्रम में भी 15 - 20 दिन के लिए प्रभु कथा सुनने जाता हूँ ।
परिवार में पत्नी, पुत्र और दो पुत्रियां है जिन सबका विवाह हो चुका है ।
74 Real-life memoir by Mr R.HariShankar titled GOD grace in life
Indexed as (1) GOD GRACE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how a person has experienced the grace of ALMIGHTY GOD all through his life. We must have the vision to feel the grace of GOD which guides us throughout our lifespan.

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GOD grace in life

I am a sincere devotee of GOD. He is protecting me from my childhood from many hardships. During my primary schooling, I have not studied well. To my surprise, in class 10th standard exams I have passed in first class. After that, I have passed my B.Com also. I have cleared my Computer Diploma course and thereafter, I have passed in my M.Com exams. And I have pursued a PGDBA course. According to me I strongly believe, that all this was happened due to the divine grace of GOD. Editor’s Comment- Credit must be given not to our efforts but to ALMIGHTY GOD as it is only GOD who makes us capable to do things.

Apart from that, lot of miracles also happened in my life because of GOD. I have been relieved from tonsillitis, sinus problems and from several problems in my life. He has safeguarded our belongings and our money and He is protecting us since beginning.

He has safeguarded me from several accidents and from job related problems. I feel that I am doing this sort of divine work, only due to His grace.

My father has expired in 2004. I feel GOD is guiding us and make us to run our life without much difficulty. But according to me, we have to face some difficult situation, when we have done bad karma, but if we sincerely worship GOD, our sufferings will be reduced and we will be able to manage and come out from the problems. According to me, GOD is always protecting us in this Kaliyuga. We have to worship Him so that we can remain blessed. Editor’s Comment-To remain blessed and to escape from hardships of life, we must remain completely devoted to ALMIGHTY GOD as seen in the instant case.


R.HariShankar
Chennai


नाम / Name : R.HariShankar
प्रकाशन तिथि / Published on : 23 September 2019

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : I am R.HariShankar, aged 47 years, an Accountant by profession living in Chennai . My Qualification is M.Com,PGDBA. I am working in a private firm as an Accountant.
I am staying with my mother and my wife. And we donot have any kids. My wife is a house wife. She has completed her B.SC in chemistry.
My mother has written devotional books on Lord Vinayaka and Murugan Puranas during 1960’s in PremaPresuram, Kodambakkam, Chennai. Due to that, I have also got the interest in writing spiritual articles for websites. By doing that, I am getting great mental satisfaction and also the readers are benefitted.
Our Holy religious books like Puranas, Vedas, Shrimad Bhagavat Gita and Upanishads are all very interesting in nature. By reading them, we will understand the path of spirituality and can initiate it in our daily life.
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