श्री गणेशाय नम:
Devotional Thoughts
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MEMOIR LANGUAGE SENDER'S NAME EDITOR'S INTRODUCTION
61 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Mr. Ram Babu Vijay This memoir shows how GOD sends guidance in form of a unknown man who helps in the hour of need. Stranded at a railway station late in midnight without any money, GOD sends help to overcome the crisis.
62 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Smt. Mandankini Ashok Aasawa This memoir shows how an unknown person helps in the hour of need when the lack of oxygen in a high altitude led to a panic situation.
63 MARRIAGE MEMOIR HINDI Smt. Kalavati Kabra This memoir shows how a surrender attitude towards GOD paves the way towards an prosperous marriage. Putting GOD first in an auspicious occasion removes all obstacles.
64 TRAVEL MEMOIR HINDI Mr BalKishan Soni This memoir shows how due to PRABHU Kripa the Assistant Station Master is motivated to arrange the connecting train so as to enable the writer reach his destination for Satsang (Holy discourse).
65 TRAVEL MEMOIR HINDI Mr Roshan Gupta This memoir shows how Almighty GOD sends help in form of a unknown person in an unknown place in night when the writer was in need of medicine. Almighty GOD always send help if we upkeep faith in HIM.
66 TRAVEL MEMOIR HINDI Mr Shishir Basotia This memoir shows how a waitlisted ticket holder gets a confirmed berth in a train for a journey en route to pilgrimage.
67 MIRACLE MEMOIR HINDI Mr Roshan Gupta This memoir shows how GOD leads the way to a total u-turn in the life of a depressed man who now is deeply involved in devotion of GOD. He becomes greatly positive as he gets a new life mission which is to seek GOD in human life. Also he gets a much needed job placement.
68 TRAVEL MEMOIR ENGLISH Mr Divy Balduwa This memoir shows how driving on a highway in night the car was short of fuel and encountered a barren patch where anything could have happened but GOD heard the prayer and the nightmare was overcome.
69 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Mr Roshan Lal Maheshwari This memoir shows how Holy Chanting at a moment of panic helps a person overcome distress. The memoir shows the power behind Holy Chanting.
70 TRAVEL MEMOIR HINDI Mr Roshan Gupta This memoir shows how faith in GOD saves a teacher to overcome difficult and testing times in the holiday trip of school children. Thrice he faced difficulty in the trip and sought the intervention of GOD and due to his faith in GOD, help was always ready.
Serial No. Post
61 Real-life memoir by Mr.Ram Babu Vijay titled विपदा में प्रभु कृपा
Indexed as PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how GOD sends guidance in form of a unknown man who helps in the hour of need. Stranded at a railway station late in midnight without any money, GOD sends help to overcome the crisis.

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विपदा में प्रभु कृपा

घटना 2009 की है । उस समय हरिद्वार में मेरे गुरूजी का साधना शिविर था ।

मैं और मेरी पत्‍नी ने प्रोग्राम बनाया कि उज्‍जैन से कोलकत्‍ता जाकर बेटी से मिलकर वहाँ से हरिद्वार पहुँच जायेगें ।

हमने ट्रैन का आरक्षण कराया और रवाना हुये । नीचे की सीट पर पत्‍नी और बीच वाली सीट पर मैं सो गया । मैंने अपना मोबाइल तकिये के नीचे रख दिया ।

रात को पानी की जरूरत हुई तो देखा की बोतल में पानी खत्‍म हो चुका है । पुछा तो पटना आने वाला था जहाँ गाड़ी 20 मिनट रूकती थी ।

पटना पहुँचने पर मैं स्‍टेशन में पानी भरने उतरा । लम्‍बी कतार थी और पानी भरने में समय लग गया । पानी भर कर देखा तो ट्रैन छुट चुकी थी । मेरे पास पानी की बोतल, चप्‍पल, बनियान और पायजामा के अलावा कुछ भी नहीं था । न रूपये थे, न मोबाईल और न एटीएम कार्ड ।

पत्‍नी सो रही थी और ट्रैन में अकेली थी । मैं घबरा गया कि अब क्‍या होगा । मैंने तत्‍काल प्रभु को विपदा में याद किया । मुझे अगले ही क्षण ऐसी प्रेरणा हुई और मैं स्‍टेशन मास्‍टर के पास पहुँचा । उन्‍होंने कहा कि आपकी छुटी हुई ट्रैन सुपरफास्‍ट थी जिसके कारण उसका बीच में कोई स्‍टेशन में रूकना नहीं होगा और वह सीधी मुगलसराये में ही रूकेगी । उन्‍होंने कहा कि उस ट्रैन को पकडना आपके लिए असंभव है ।

तभी प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन मुझे हुये और एक व्‍यक्ति आया और मुझसे कहा कि स्‍टेशन मास्‍टर से कहो कि मुगलसराये स्‍टेशन में सुचना देकर आपकी पत्‍नी और समान को वहाँ उतारने की व्‍यवस्‍था करे । फिर आप अगली ट्रैन से मुगलसराये चले जाओ और इस तरह पत्‍नी से आप वापस मिल जाओगे । संपादक टिप्पणी - विपत्ति के समय प्रभु को सच्‍चे मन से याद करने पर प्रभु किसी भी निमित से हमारी बुद्धि को प्रेरणा देकर उसे जागृत करते हैं जिससे हम सही निर्णय ले सकें ।

मेरे पास न पैसे थे, न मोबाईल था और यह देखकर उस व्‍यक्ति ने अपने मोबाईल से मेरा फोन मिलाया जिसको मेरी पत्‍नी ने ट्रैन में उठाया । मैंने पत्‍नी से बात की और उसे पूरी बात बताई और समान सहित मुगलसराये में उतरने हेतु कहा । कहे अनुसार पत्‍नी को अगले स्‍टेशन मुगलसराये में वहाँ के स्‍टेशन मास्‍टर ने उतार लिया । मुझे पटना के स्‍टेशन मास्‍टर ने दूसरी ट्रैन से मुगलसराये के लिए रवाना किया । रास्‍ते में एक अन्‍य सहयात्री के माबाईल से पत्‍नी से बात करके उसे तसल्‍ली दी और इन्‍तजार करने को कहा ।

सुबह चार बजे मुगलसराये पहुँचा और पत्‍नी से मिला । सुबह 10 बजे दूसरी ट्रैन में बैठकर हम हरिद्वार पहुँचे और साधना शिविर में शामिल हुये ।

जब मैं उस दिन को याद करता हूँ जब मैं पानी की बोतल, चप्‍पल, बनियान और पायजामा में रात 2 बजे अनजान जगह बिना रूपये, बिना टिकट और बिना मोबाईल के था और पत्‍नी अकेली ट्रैन में छुट गई थी और मैंने प्रभु को पुकारा तो प्रभु ने तत्‍काल मेरी मदद के लिए उस व्‍यक्ति को भेजा । उसने युक्ति बताई और उसके सहयोग और मार्गदर्शन से मैं सही निर्णय ले पाया । प्रभु ने उस व्‍यक्ति के मार्फत मुझे प्रेरणा भेजी कि पत्‍नी को अगले स्‍टेशन पर उतारने की व्‍यवस्‍था कराओ और स्‍वयं दूसरी गाड़ी पकड कर वहाँ पहुँच जाओ ।

प्रभु की कृपा के कारण ही अनजान जगह पत्‍नी उतरी और प्रभु ने उसे सही सलामत रखा । प्रभु कृपा के बिना अनजान जगह कौन प्रेरणा देता और कौन मदद करता । संपादक टिप्पणी - अनजान जगह रात के दो बजे बिना पैसे, बिना मोबाईल, बिना टिकट और पत्‍नी अकेली ट्रैन में फिर भी प्रभु कृपा विपत्ति में कैसे काम करती है यह इस प्रसंग में देखने को मिलता है ।

राम बाबु विजय
उज्‍जैन


नाम / Name : Mr Ram Babu Vijay
प्रकाशन तिथि / Published on : 13 Nov 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 66 वर्ष की है । मैनें M.Com,LLB एवं CAIIB किया है । मैनें ज्‍योतिषाचार्य का अध्‍ययन भी किया है ।
मैंने बैंक की 38 वर्ष सन 1969 से 2008 तक नौकरी की और मुख्‍य प्रबंधक के पद से सेवानिवृत हुआ ।
परिवार में पत्‍नी, एक लड़का एवं दो लड़किया हैं । मैनें सारे र्तीथों के दर्शन कर लिये हैं एवं सत्‍संग मुझे प्रिय है । जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है मैं उसका लाभ लेने के लिए जाता हूँ ।
62 Real-life memoir by Smt. Mandankini Ashok Aasawa titled र्तीथ में प्रभु कृपा
Indexed as PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how an unknown person helps in the hour of need when the lack of oxygen in a high altitude led to a panic situation.

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र्तीथ में प्रभु कृपा

मेरा बड़ा बेटा, बहु और पोती श्री केदारनाथजी की यात्रा पर गये थे । सोमवार का दिन था ।

घटना उस समय की है जब वे श्री केदारनाथजी से आधा किलोमीटर के दूरी पर थे और पैदल चढाई कर रहे थे ।

ठंड के कारण बहु की तबियत अचानक बिगड गई । उसका शरीर ठंड में अकड़ गया और ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर नीला पड गया । सब लोग घबरा गये और मेरी पोती अपनी मां की हालत देखकर जोर-जोर से रोने लगी ।

एक टपरी वाले ने यह देखा तो उसने अपने यहाँ चाय पीने बैठे लोगों को तुरंत टपरी से बाहर निकाला और मेरे बेटे, बहु और पोती को तुरंत भीतर ले गया । उसने सिगड़ी जलाई और दो-तीन कम्‍बल देकर बहु को उसमें लपेटने के लिए कहा । मेरे बेटे को मेरी बहु के हाथ पैर को रगड़ने के लिए कहा ।

एक घंटे के बाद मेरी बहु ठीक हुई और हमें प्रभु के साक्षात कृपा के दर्शन हुये जब प्रभु ने उसे बचाया ।

टपरी वाले को प्रभु ने ही प्रेरणा दी और उसे निमित बनाया और ठंड से जकड़ी और ऑक्सीजन की कमी से जुझ रही मेरी बहु के लिए उसने ही प्रभु प्रेरणा से सभी अनुकूल व्‍यवस्‍था की । अनजान जगह भी जब हम प्रभु को पुकारते हैं तो प्रभु किसी को निमित बनाकर हमारी रक्षा करते हैं । संपादक टिप्पणी - विपत्ति के समय प्रभु में पूर्ण आस्‍था रखना और पूर्ण श्रद्धा से प्रभु को याद करना विपत्ति निवारण का एक अचुक साधन है ।

उस दिन के बाद मेरे बेटे की उस पूरी घटना को देखकर प्रभु श्रीशिवजी में इतनी श्रद्धा-भक्ति बढ गई कि वह सोमवार का नियमित व्रत करने लगा ।

श्रीमति मंदाकिनी अशोक आसावा
कोल्‍हार भगवती (अहमदनगर-महाराष्‍ट्र)


नाम / Name : Smt. Mandankini Ashok Aasawa
प्रकाशन तिथि / Published on : 21 Nov 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 61 वर्ष की है । परिवार में दो लड़के-बहु और 2 पोतियां हैं जो साथ रहते हैं ।
प्रभु की श्रद्धा से पूजा-सेवा करना मुझे अच्‍छा लगता है । मैं जो भी सेवा-पूजा करती हूँ वह श्रद्धा से करती हूँ ।
कोल्‍हार में भगवती मंदिर है जिसकी मेरे मान्‍यता है ।
प्राय: सभी तीर्थो के दर्शन मैंने कर लिये हैं । सत्‍संग मुझे अच्‍छा लगता है और जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है, मैं उसका निश्‍चित लाभ लेने जाती हूँ ।
63 Real-life memoir by Smt. Kalavati Kabra titled प्रभु कृपा से विवाह
Indexed as MARRIAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how a surrender attitude towards GOD paves the way towards an prosperous marriage. Putting GOD first in an auspicious occasion removes all obstacles.

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प्रभु कृपा से विवाह

मेरे जंवाई का स्‍वर्गवास हो चुका था और मेरी एक नाती शादी लायक थी । मेरी बेटी और उसकी दो लड़की के अलावा उनके परिवार में कोई नहीं था ।

इसलिए उनके परिवार में सगाई के लिए प्रयास करने वाला कोई नहीं था । ऐसी अवस्‍था में सगाई का प्रयास करने की जिम्‍मेवारी ननिहाल पर आ गई ।

हमने प्रयास शुरू किया तो संबंध आने लगे पर कोई न कोई कारण से कोई भी संबंध पसंद नहीं आया । मेरे बेटे ने एक दिन गुस्‍से मे कह दिया कि इतने संबंध को आप लोगों ने नामंजुर किया है तो अब आप मां-बेटी ही अनुकूल संबंध खोज ले ।

बचपन से मुझे प्रभु से जुड़ने का संस्‍कार मिला था और प्रभु सेवा मैं निरंतर करती आ रही थी । मैंने अब विवाह की अनुकूल व्‍यवस्‍था करने के लिए प्रभु के श्रीचरणों की शरणागति ली ।

फिर एक दिन मैंने अपने भाई को कोल्‍हापुर फोन किया । उन्‍होंने एक बहुत अच्‍छा संबंध बताया । मैंने मेरी बेटी और नाती से बात की और वे भी तैयार हो गये क्‍योंकि परिवार अच्‍छा था, बड़ा था और परिवार में समृद्धि थी ।

प्रभु की ऐसी कृपा हुई कि लड़के वाले भी लड़की देखने तुरंत आ गये । दूसरे ही दिन उन्‍होंने हमें संदेश भिजवाया कि लड़की उनको पसंद है । पर उन्‍होंने एक शर्त रखी कि शादी महाबलेश्‍वर जाकर करनी पडेगी ।

मैंने प्रभु को धन्‍यवाद दिया और फिर प्रभु के श्रीचरणों की शरणागति ली और प्रभु से अरदास किया की अंजान जगह शादी की व्‍यवस्‍था की जिम्‍मेवारी अब आपको ही संभालनी है । संपादक टिप्पणी - सही तरीका यही है कि जो कार्य प्रभु कृपा से सम्पन्न हो जाये उसके लिए प्रभु को धन्‍यवाद ज्ञापित करना और नये कार्य की अनुकूल व्‍यवस्‍था के लिए फिर से प्रभु की शरणगति लेनी ।

महाबलेश्‍वर हमारे यहाँ से काफी दूर था और हमारे लिए अंजान था । पर प्रभु ने प्रार्थना स्‍वीकार करके सभी व्‍यवस्‍था इतनी सुचारू करवाई की ऐसी शादी हुई कि सब तरफ उसकी तारीफ हुई ।

मैंने साक्षात अनुभव किया जैसे प्रभु ने स्‍वयं पधार कर सभी अनुकूल व्‍यवस्‍था करवाई । पूरे विवाह प्रसंग में कोई भी विघ्‍न नहीं आया और हर व्‍यक्ति ने ऐसा सहयोग दिया जैसे उनके घर की ही शादी हो । संपादक टिप्पणी - पहली बात, प्रभु के अनुकूल होते ही संसार अनुकूल हो जाता है । दूसरी बात, प्रभु विघ्नहर्ता हैं इसलिए प्रभु कृपा जब होती है तो विघ्‍न वहाँ फटक नहीं सकता ।

श्रीमति कलावती काबरा
गंगाखेड (परमनी-महाराष्‍ट्र)


नाम / Name : Smt. Kalavati Kabra
प्रकाशन तिथि / Published on : 24 Nov 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 69 वर्ष की है । मेरे पति डॉक्टर हैं और परिवार में दो बेटे-बहु और तीन पोती एवं एक पोता है जो साथ रहते हैं ।
प्रभु के बालरूप श्री लड्डुगोपालजी की सेवा करती हूँ ।
प्राय: सभी तीर्थो के दर्शन मैंने कर लिये हैं और सत्‍संग मुझे बहुत प्रिय है । मैं सत्‍संग के बिना नहीं रह सकती इसलिए जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है मैं उसका लाभ लेने के लिए जाती हूँ ।
64 Real-life memoir by Mr Balkishan Soni titled यात्रा में प्रभु कृपा
Indexed as TRAVEL MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how due to PRABHU Kripa the Assistant Station Master is motivated to arrange the connecting train so as to enable the writer reach his destination for Satsang (Holy discourse).

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यात्रा में प्रभु कृपा

मेरे बेटे की 2010 में देहरादून में नौकरी लगी । कुछ समय बाद हम उससे मिलने देहरादून आये हुये थे ।

वापसी की टिकट बनी हुई थी क्‍योंकि मुझे श्री शिवरात्री से 10 दिनों तक चलने वाले सत्‍संग में भाग लेने ढालेगांव (महाराष्‍ट्र) के गीता भवन में पहुँचना था ।

मैं हर वर्ष नियमित 10 दिवसीय सत्‍संग में सहभागी होता हूँ एवं परिवार में कोई शादी / उत्‍सव भी होते हैं तो भी उसे छोडकर वहाँ जाता हूँ ।

मैं देहरादून से हरिद्वार रेलवे स्‍टेशन रात्री 9 बजे पहुँचा । मेरी हरिद्वार से दिल्‍ली तक की ट्रैन सुबह 6 बजे की थी । प्रतिक्षालय में पहुँचा तो किसी ने बताया कि ट्रैन 15-20 घंटे विलम्‍ब से चल रही है और पिछले दिन की ट्रैन विलम्‍ब के कारण अभी अभी रवाना हुई है ।

सुबह जाने वाली ट्रैन भी विलम्‍ब से चल रही है । मुझे पता था कि अगर हरिद्वार से ट्रैन विलम्‍ब हुई तो मेरी दिल्‍ली से आगे वाली ट्रैन, जो मुझे पकड़नी है, वह छुट जायेगी और मैं सत्‍संग में समय पर नहीं पहुँच सकुंगा ।

मैंने प्रभु के बालरूप श्री लालाजी, जिनकी सेवा मेरे साथ चलती है उन्‍हें कहा कि अब आपकी कृपा के बिना मैं समय पर सत्‍संग में नहीं पहुँच सकता । संपादक टिप्पणी - किसी भी विपदा के समय प्रभु को आगे कर देने से प्रभु आगे की बागडोर स्‍वत: सम्‍भल लेते हैं । पर यह तभी भी संभव होता है जब प्रभु में हमारी गहरी श्रद्धा और भक्ति हो ।

तभी हरिद्वार रेलवे स्‍टेशन के सहायक स्‍टेशन मास्‍टर से मैं मिलने गया जिन्‍हें मैं पहले से जानता था । उन्‍हें मैंने मेरी परेशनी बताई कि मेरी ट्रैन विलम्‍ब से आ रही है और मुझे हरिद्वार से दिल्‍ली समय पर पहुँचना है इसलिए अन्‍य किसी गाड़ी में मुझे स्‍थान दिला देवें ।

उन्‍होंने सभी दिल्‍ली जाने वाली गाड़ीयों की आरक्षण चैक किया । सभी में लम्‍बी प्रतीक्षा सुची चल रही थी । कहीं भी आरक्षण की सम्‍भावना नहीं थी ।

तब उन्‍होंने मेरी विलम्‍ब से आ रही ट्रैन के गार्ड से सम्पर्क किया जो मेरठ तक पहुँच चुका था । वहाँ से 5 घंटे में वह ट्रैन हरिद्वार पहुँचनी थी । फिर उसकी सफाई होकर वापस दिल्‍ली के लिये रवाना होनी थी ।

प्रभु ने उस सहायक स्‍टेशन मास्‍टर को ऐसी प्रेरणा दी की उन्‍होंने मुझसे कहा कि आप चिन्‍ता मत करो । आपकी ट्रैन रात 2 बजे मेरठ से पहुँचेगी और उसका रवाना होने का निर्धारित समय सुबह 6 बजे का है । वैसे तो यह संभव नहीं है पर मैं किसी भी हालत में गाड़ी को रात्री में ही साफ करवा कर सुबह 5 बजे तक तैयार करवा दूंगा जिससे निधारित समय सुबह 6 बजे गाड़ी रवाना हो सके । संपादक टिप्पणी - व्‍यवहारिक दृष्टि से संभव नहीं होने पर भी प्रभु प्रेरणा ने काम किया और सहायक स्‍टेशन मास्‍टर ने एक असंभव प्रतीत होने वाली चीज को संभव किया ।


सुबह 5 बजे प्रतिक्षालय में सहायक स्‍टेशन मास्‍टर का आदमी आया जिसने विशेष रूप से मुझे सुचना दी कि गाड़ी साफ होकर प्लेटफार्म में लग चुकी है । गाड़ी निधारित समय सुबह 6 बजे रवाना हुई और हम समय से दिल्‍ली पहुँचे जहाँ से आगे की ट्रैन हमें समय पर मिल गई और हम सही समय ढालेगांव सत्‍संग हेतु पहुँच गये । मेरी श्रद्धा थी पहुँचने की और प्रभु ने मेरी श्रद्धा को कायम रखते हुये मुझे पहुँचाया ।

बालकिशन सोनी
इच्‍छलकरणजी


नाम / Name : Mr Balkishan Soni
प्रकाशन तिथि / Published on : 08 December 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मैं 78 वर्ष का हूँ । मेरा कपड़े का व्‍यवसाय है । परिवार में तीन लड़के और दो लड़कियां एवं पत्‍नी है ।
मेरा काफी समय सत्‍संग में बीतता है एवं मैनें प्राय: सभी तीर्थो की यात्रा कर ली है ।
सत्‍संग में मेरी विशेष रूची है एवं वर्ष में छ: महिने मैं धार्मिक आयोजनों का लाभ लेने हेतु घर से बाहर तीर्थो में रहता हूँ ।
65 Real-life memoir by Mr Roshan Gupta titled अन्जान शहर में मदद
Indexed as TRAVEL MEMOIR


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अन्जान शहर में मदद

विगत अक्टोबर माह में विद्यालय के बच्चों को लेकर मैसूर (शैक्षणिक भ्रमण) पर जाना हुआ । घर से निकलने से पहले ही जबरदस्त सर्दी खांसी शुरु हो गयी थी, इसलिये डॉक्टर से दो दिन की दवाई लेकर आया था । दो दिन होते ही दवा तो खत्म हो गयी लेकिन सर्दी खांसी ठीक नहीं हुई ।

टूर ५ दिनों का ओर बचा था ओर बिना दवा लिये ठीक होना संभव नही था । दिनभर बच्चों की देखभाल करने में बिल्कुल समय नहीं मिल पाता था, इसलिए रात ८ बजे होटल से नीचे आकर एक दुकान वाले से पूछा कि भैया यहां दवाई की दुकान कहां होगी तो उन्होंने बताया कि आसपास २ किलोमीटर तक कोई दवा की दुकान नही हैं ओर जहाँ दूर दुकान है वहाँ रात में जाने का कोई साधन नहीं मिलेगा । मैंने निराश होकर वापस जाने लगा । तभी पास में एक व्यक्ति खड़े थे, उन्होंने कहा आप चिंता मत करो, मैं आपको वहां छोड़ देता हुँ, मुझे वहीं जाना है । मैं मन ही मन सोचने लगा कि वापस कैसे आऊंगा तो उन्होंने कहां आप इस शहर में अन्जान हो ओर हम दोनों भी एक दूसरे से अन्जान है लेकिन आप मुझ पर भरोसा कर सकते हैं ।

मुझे भी ना जाने क्या लगा ओर मैं फिर बिना सोचे समझे उनकी बाईक पर बैठ गया । रास्ता बिल्कुल सुनसान और मै इसी फिक्र में था कि वापस कैसे आऊंगा ओर वे अपनी ही धुन में मस्त मुझे दवाई दुकान तक ले गये । रास्ता वाकई में काफी लंबा था । मैंने दवाई ली, उन्होंने फिर गाड़ी पर बैठने को कहा ओर थोड़ी देर बाद कहा कि आपका होटल आ गया । मैं रास्ता नहीं पहचान पाया तो उन्होंने कहा कि वो सामने आपका होटल है ।

मुझे कुछ होश नहीं कि मैं किसके साथ गया, किस रास्ते से गया, कहां गया, कब दवा लेकर वापस आ गया, मेरे साथ वालों को पता तक नहीं चला कि मैं कहीं गया था । अब तक मै लगभग पूरा टूर भूल चुका हुँ सिवाय उस अन्जान सज्जन के, ओर मुझे आज भी यही अहसास है कि या तो वे भगवान ही थे या उनके भेजे हुए दूत । संपादक टिप्पणी - प्रभु विपत्ती का कैसे निवारण करते हैं और सहायता कैसे हम तक पहुँचाते हैं, यह इस प्रसंग में देखने को मिलता है । अनजान राहों पर सिर्फ और सिर्फ प्रभु ही हमारे साथ होते हैं ।

रोशन गुप्ता
इन्दौर


नाम / Name : Mr Roshan Gupta
प्रकाशन तिथि / Published on : 17 December 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरा नाम रोशन गुप्‍ता है, मेरी उम्र ३२ वर्ष है, प्रभु कृपा से इन्दौर के एक निजी विद्यालय में शिक्षक हुँ ।
मुझे सत्‍संग प्रिय है और एक वेबसाईट के माध्यम से मैं प्रभु के कार्य से जुडा हुआ हूँ ।
जीवन में प्रभु के लिए समय बढाने की मेरी इच्‍छा है ।
66 Real-life memoir by Mr Shishir Basotia titled यात्रा के दौरान प्रभु कृपा
Indexed as TRAVEL MEMOIR


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यात्रा के दौरान प्रभु कृपा

बात उस समय की है जब मैं कोलकत्‍ता में रहता था । मैं हर 2-3 महिने में दिल्‍ली होते हुये श्री सालासरजी एवं श्री जीणमाताजी के दर्शन हेतु राजस्‍थान जाता था ।

मैं प्राय: कोलकत्‍ता से राजधानी ट्रैन से शाम को 5 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 10 बजे दिल्‍ली पहुँचता था जहाँ से आगे की यात्रा करता था ।

एक बार की बात है मेरी राजधानी ट्रैन की टिकट प्रतीक्षा सुची में थी और उसी समय भारतीय रेलवे ने राजधानी ट्रैन के लिए नये नियम लागु किये थे कि कोई भी यात्री प्रतीक्षा सुची की टिकट लेकर यात्रा करना तो दूर, ट्रैन में चढ भी नहीं सकता है । नये नियम बड़ी सख्‍ती से लागु किये गये थे ।

मैंने भी दर्शन करने का पक्‍का मानस बना रखा था पर दुर्भाग्यवश अन्‍त तक मेरी टिकट प्रतीक्षा सुची में ही रह गई, कन्‍फर्म नहीं हो पाई ।

मैं बिना नियम की परवाह किये राजधानी ट्रैन में चढ गया और एक खाली बर्थ देखकर वहाँ बैठ गया । टीटी आया और उसने टिकट मांगी । मैंने अपनी वेटिंग की टिकट दिखाई जिस पर टीटी बिगड़ गया । मेरी भी टीटी से बहस हो गई । मैंने यहाँ तक कह दिया कि मुझे जाना जरूरी है और मैं कही भी बैठ कर यात्रा कर लूंगा । पर टीटी नहीं माना और बहस होते होते बात बहुत बिगड़ गई ।

टीटी ने अपने उच्‍च अधिकारी को बुला लिया और उन लोगों ने अपना प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया कि आपको अगले स्‍टेशन धनबाद में उतारेगें और आपको तीन गुना जुर्माना भी अदा करना पडेगा ।

मैं विपत्‍ती में फंस गया था । मैंने तत्‍काल प्रभु को याद किया और प्रभु से अरदास की और निवेदन किया की इतने सहयात्री के समक्ष मेरी लाज रख लेना और किसी भी तरह मैं आपके दर्शन हेतु पहुँच पांऊ, ऐसी व्‍यवस्‍था कर देना । मैंने 5-7 मिनट आँखें बंद कर प्रभु का ध्‍यान किया ।

इसके 15-20 मिनट बाद ट्रैन एकाएक रूक गई और लगभग एक घंटा रूकी रही । फिर एक घंटे बाद घोषणा हुई कि रेल पटरी में किसी तकनीकी खराबी के कारण ट्रैन धनबाद नहीं जाकर दूसरे मार्ग से पटना होकर दिल्‍ली जायेगी ।

प्रभु की कृपा के तत्‍काल दर्शन मुझे हुये क्‍योंकि जिस खाली बर्थ पर मैं बठा था वह धनबाद से दिल्‍ली तक के लिए आरक्षित थी और किसी यात्री को धनबाद से चढकर दिल्‍ली तक की यात्रा करनी थी । अब ट्रैन धनबाद जा ही नहीं रही थी इसलिए दिल्‍ली तक वह बर्थ खाली थी ।

प्रभु की कृपा के फिर दर्शन हुये जब टीटी स्‍वयं मेरे पास आया और वह बर्थ मुझे आवंटित कर गया ।

प्रभु की ऐसी कृपा हुई की मुझे न तो कहीं उतारा गया और न ही जुर्माना लगा और मैं सकुशल दर्शन हेतु पहुँच गया । संपादक टिप्पणी - विपत्ति में प्रभु को सच्‍चे मन से पुकारने से प्रभु तत्‍काल उस विपत्ति का निवार्रण करते हैं । प्रभु की कृपा देखें की यहाँ ट्रैन का मार्ग बदल गया, आरक्षित यात्री आया नहीं और टीटी जो पहले बहस कर रहा था उसने स्‍वयं आकर खाली बर्थ का आवंटन कर दिया ।

शिशिर बासोतिया
जयपुर


नाम / Name : Mr Shishir Basotia
प्रकाशन तिथि / Published on : 21 December 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 54 वर्ष है । मैंने बीकॉम (ऑनर्स) करने के बाद कई तरह के तकनीकी कोर्स किये हैं ।
सत्‍संग मुझे प्रिय है । मैंने काफी तीर्थो की यात्रा कर ली है ।
परिवार में माता-पिता, पत्‍नी और दो लड़कियां हैं ।
67 Real-life memoir by Mr Roshan Gupta titled प्रभु ने जीवन को सही दिशा दी
Indexed as MIRACLE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how GOD leads the way to a total u-turn in the life of a depressed man who now is deeply involved in devotion of GOD. He becomes greatly positive as he gets a new life mission which is to seek GOD in human life. Also he gets a much needed job placement.

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प्रभु ने जीवन को सही दिशा दी

मेरी उम्र ३२ वर्ष है और मैं एक निजी विद्यालय में शिक्षक हुँ । करीब ११ वर्ष पहले की बात है । स्नातक तक शिक्षा पूरी होते ही पारिवारीक आवश्यक्ताओं के चलते उच्च शिक्षा का विचार छोड़कर मुझे नौकरी शुरू करनी पडी । आधुनिकता से पूरी तरह प्रभावित एक युवा जो भगवान के आगे हाथ भी केवल इसलिये जोड़ लेता था कि हे भगवान, परीक्षा में पास करवा देना या इसी तरह के अन्य किसी लालच के कारण । कॉलेज में शिक्षा के दौरान दो लड़कियों को बहन बनाया, लेकिन शिक्षा पूरी होते ही वो लोग मुझे छोड़्कर चली गई और बातचीत बंद कर दी । मैं उनके दुःख में दुखी रहने लगा । नौकरी करते करते ही एक लड़की के एकतरफा प्रेम में पूरी तरह डूब गया, मेरी अत्यधिक महत्वाकांक्षा को जानकर उस लड़की ने मुझसे यह सोचकर बातचीत बंद कर दी कि समय के साथ मैं ठीक हो जाउंगा ।

परन्तु लगातार हुई दो घटनाओं से मैं विरह मैं इस तरह पागल हुआ कि बूरी तरह अवसाद में डूब गया । पूरा जीवन बर्बाद करने का निश्चय किया, अपना करियर बर्बाद किया, शरीर का स्वास्थ्य का यथासंभव नुकसान किया, सारे रिश्तेदारों, दोस्तों, सभी से मिलना-जुलना, बात करना सब कुछ छोड़ दिया । मन में केवल एक ही प्रश्न आता था कि हम इस जीवन में क्या केवल इसीलिये आये हैं कि खूब पैसे कमायें, शादी करें, भोग विलास करें, वंश वृद्धि करें, सांसारिक सामाजिक सम्मान के लिये नौटंकी करें और फिर अंत में मर जायें ? क्योंकि हर व्यक्ति इसी संसार चक्र में उलझा हुआ दिखाई देता था । जीवन का कोई उद्देश्य नहीं था, केवल सांस चल रही थी, इसलिये जिये जा रहा था । जीवन के कीमती ९ वर्ष अवसाद में निकाले । दो वर्ष पहले फिर एक लड़की से प्रभावित होकर उसकी मित्रता में पड़ा । परन्तु लगभग दो साल की मित्रता से बाद माया के प्रभाव में अचानक उसने भी संबंध तोड़ लिये, यहां तक कि उसके भाई ने भी अपने दोस्तों के साथ मिलकर मेरे घर आकर बुरी तरह डराया धमकाया । भावुक स्वभाव का होने के कारण मैं ये सब सहन नहीं कर पाया और बुरी तरह टूट गया । जीवन में अब ना तो कोई सहायता करने वाला बचा था, ना जीवन का कोई उद्देश्य बचा था । कुल मिलाकर बुरी तरह माया के प्रभाव में जकड़ा हुआ था । निराशा में नौकरी तक छोड़ दी । कोई होश ही नहीं था कि क्या कर रहा हुँ या क्या हो रहा है ।

जीवन से बुरी तरह हारकर बहुत ही संकोच के साथ जयपुर के एक पूर्व के परिचित से संपर्क किया एवं उन्हें अपनी वस्तु-स्थिति, अवसाद एवं वर्तमान परिदृश्य से अवगत कराया । उन्होंने ढांढस बंधाया एवं सारी बातों को भुलाकर प्रभु से जुड़ने के लिये प्रेरित किया । उनके बताये अनुसार सब कुछ भुलाकर नित्य मंदिर जाना, हनुमान चालिसा का पाठ करना एवं श्रीमद भगवत गीताजी का पाठ करना प्रारंभ किया । सबसे बड़ी प्रभु कृपा यहीं से शुरू हुई क्योंकि जिस व्यक्ति ने कभी प्रेम से भगवान का नाम ना लिया हो, वो अचानक दिन में ३-४ घंटे प्रभु के लिये निकालने लगे ये संभव ही नहीं था । नियम का पालन प्रारंभ करने के पहले ही दिन प्रभु ने मुझे संभाल लिया और मन से स्वयं को नुकसान पहुंचाने के भाव खत्म हो गया । संपादक टिप्पणी - प्रभु तत्‍काल कैसे एक शरणागत को सम्‍भालते हैं यह यहाँ देखने को मिलता है । हम एक कदम प्रभु की तरफ बढाते हैं तो प्रभु की तत्‍काल अनुकम्‍पा होती है । धीरे-धीरे श्रीमद भगवत गीताजी के पाठ का विश्राम किया, जिसमें लगभग एक माह का समय लगा । तत्पश्चात उन परिचित द्वारा उपलब्ध करवाये गये श्रीमद भागवत जी के सात दिवसीय ऑडियो का श्रवण आरंभ किया । शुरुआत में तो यह स्थिति थी कि मैं कथा श्रवण के लिये आधे घंटे ठीक से बैठ भी नहीं पाता था और जैसे तैसे कथा सुनता था पर प्रभु कृपा से धीरे धीरे मन लगने लगा लगभग दो माह के समय में श्रीमद भागवत जी के सात दिवसीय ऑडियो के श्रवण का विश्राम किया ।

प्रभु कृपा के विभिन्न रूप में दर्शन मुझे हुये । जब कोई नहीं बचा तब प्रभु ने मुझे तुरंत संभाला । संपादक टिप्पणी - जब कोई सम्‍भलने वाला नहीं होता है तो हारे के सहारे प्रभु ही होते हैं । खुद से जुड़ने के लिये प्रेरित किया । मंदिर जाने, हनुमान चालिसा का पाठ करने, श्रीमद भगवत गीताजी का पाठ करने एवं श्रीमद भागवत जी के ऑडियो का श्रवण करने की शक्ति दी । तीन माह की इस अवधि में मेरे पास भले ही नौकरी नहीं थी लेकिन पुरानी जगह जहां काम करता था वहां के मालिक ने घर बैठे पुरा वेतन भिजवा दिया, जिसे मैं छोड़ आया था, जिससे पारिवारिक आवश्यक्ताओं की पूर्ति होती रही । मालिक ने ऐसा आजतक किसी के साथ नहीं किया था । प्रभु सान्निध्य के परिणामस्वरूप प्रभुकृपा से मैं केवल तीन माह में पूरी तरह (१०० %) डिप्रेशन से बाहर आ गया, जिसे मेरी जिद के चलते पिछ्ले ११ वर्षों में कोई ठीक नहीं कर पाया था । संपादक टिप्पणी - अवसाद के चलते मनुष्‍य की सोच नकारात्‍मक हो जाती है और वह निराशावादी हो जाता है । प्रभु कृपा जीवन में जब आती है तो वह जीव को सकारात्‍मक और आशावादी बना देती है । साथ ही साथ मुझे उस प्रश्न का उत्तर भी मिला जिसे में वर्षों से ढुंढ रहा था कि हम आखिर क्यों जी रहे हैं । जीवन का अब तक कोई लक्ष्य नहीं था परन्तु अब जाकर जीवन का नया लक्ष्य मिला "सच्चिदानंद स्वरूप भगवान की भक्ति" । संपादक टिप्पणी - प्रभु कृपा हमें मानव जीवन के सच्चे उद्देश्य से परिचित कराती है और हमें प्रभु भक्ति के रंग में रंग देती है ।

संसार से प्रेम किया तो दुःख ही दुःख मिला पर प्रभु से प्रेम शुरू किया उसने तीन माह में मुझे हर संकट से उबार लिया । संपादक टिप्पणी - संसार को संतों ने दुखालय कहा है और प्रभु सानिध्य को ही आनंद का स्त्रोत्र माना है । कथा श्रवण के विश्राम के मात्र चार दिनों के अंदर मुझे एक बड़े विद्यालय में शिक्षक की नौकरी लग गई । आप लोगों को जानकर और आश्चर्य होगा कि वह पद महिला शिक्षक के लिये था लेकिन प्रभु कृपा से मेरा डेमो हुआ और विद्यालय के प्राचार्य ने तुरंत प्रभाव से मुझे नियुक्ति दे दी । अब तो जीवन के एक एक क्षण में प्रभु कृपा दिखाई देती है । संपादक टिप्पणी - जीवन के हर क्षण प्रभु कृपा दिखना सच्‍ची भक्ति का लक्षण है । नौकरी लगने की कोई खुशी नहीं है, वह मेरे लिये केवल जीवन यापन का एक साधन है, जिसे मुझे निष्काम भाव से निभाना है क्योंकि प्रभु कृपा से अब मुझे मेरे जीवन का उद्देश्य मिल चुका है । सुख-दुःख, लाभ-हानि, जीवन की हर अच्छी-बुरी परिस्थिति में भगवान हमारे साथ होते हैं, बस हम उन्हें देख नहीं पाते । नौकरी भी प्रभु ने ही दी है, शरीर भी प्रभु ने ही दिया है, अब भगवान से कोई सांसारिक वस्तु की चाह नहीं है, केवल एक ही चीज उससे मांगता हुँ कि अपनी सेवा, अपनी भक्ति से मुझे अब कभी दूर मत करना । संपादक टिप्पणी - सच्‍ची प्रार्थना प्रभु से यही होनी चाहिए कि प्रभु हमें अपने कृपा दृष्टि से कभी दूर नहीं करें और प्रभु के लिए हमारा भक्ति भाव निरंतर बढता जाये । ॥ जय श्री कृष्ण ॥

रोशन गुप्ता
इन्दौर


नाम / Name : Mr Roshan Gupta
प्रकाशन तिथि / Published on : 28 December 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरा नाम रोशन गुप्‍ता है, मेरी उम्र ३२ वर्ष है, प्रभु कृपा से इन्दौर के एक निजी विद्यालय में शिक्षक हुँ ।
मुझे सत्‍संग प्रिय है और एक वेबसाईट के माध्यम से मैं प्रभु के कार्य से जुडा हुआ हूँ ।
जीवन में प्रभु के लिए समय बढाने की मेरी इच्‍छा है ।
68 Real-life memoir by Mr Divy Balduwa titled GOD helped in night
Indexed as TRAVEL MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how driving on a highway in night the car was short of fuel and encountered a barren patch where anything could have happened but GOD heard the prayer and the nightmare was overcome.

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GOD helped in night

One fine day myself, my wife and my son started from Jaipur to Delhi by car at 8 am for meeting a doctor for my son. The appointment was scheduled for 3:30pm. Somehow that journey didn't started well and we were stuck up with road traffic and we were not able to reach on time so our appointment was cancelled.

Now we were asked to go to a hospital where the Doctor was sitting and it was far from his house in Greater Kailash. We somehow reached and were free by 6:30pm. We started back for Jaipur and had dinner on the way and after dinner my son and wife slept in the car and I alone was driving the car.

Suddenly I saw that petrol need to be refilled. After 30 kms a petrol pump came and I stopped but the petrol was out of stock and only diesel was available there. Till now the sign for low fuel had also come and as per my calculation now car could run only for next 25 kms. I started praying that I get some petrol now in next few kilometers. After 20 kms a petrol pump came but at the opposite side and there was no divider cut but I crossed the road to get petrol in a bottle.

Now the time was around 10:45 pm and the pump was closed. I was shivering with bad thoughts about robbery and mischief coming to my mind. My wife was also awake by now and we started praying that the petrol in the car should not get exhausted.

Now there was a petrol pump after 5 kms and we reached there but there was nobody to fill. A truck driver told that the staff of the petrol pump was ill and so the pump was closed. It was a nightmare now as it was 11 pm in night and the petrol was about to come to an end in next 5 kms. There was no petrol pump for next 20 kms therefore we couldn't do nothing. We started praying to LORD Ganeshaji and LORD Hanumanji. I didn’t know how but the car drove for 30 more kms and we got the petrol but it was not the end of our nightmare.

Now the road on which we were driving was totally empty with no car, no truck ,nobody was there on the road. My son and wife slept again in the car. The car was running at 130kms/hr without shivering which was next to impossible. It was as if some divine force was there pushing the car at full speed in that empty barren patch of 30 kms of road.

Finally we reached near Jaipur and then my wife and son waked up again. We thanked LORD Ganeshaji and LORD Hanumanji for being with us in distress when we were short of fuel and then again when we were driving alone in the empty barren patch in midnight where anything could have happened. Editor's Comment - When we wholeheartedly pray to GOD in distress, He always comes to our rescue. Here in a nightmare situation GOD’s help could be easily seen as the writer has upfront experienced it.

Divy Balduwa
Jaipur


नाम / Name : Mr Divy Balduwa
प्रकाशन तिथि / Published on : 03 January 2016

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : : I am aged 34 years and I belong to Jaipur (Rajasthan). I did my MBA and now I am into my own business of land management (Interiors and Vastu) . I have a legal advisory firm and am also into liasoning business.
My hobbies are reading, exercising, making friends, exploring new places and their history.
May GOD bless everybody.
69 Real-life memoir by Mr Roshan Lal Maheshwari titled प्रभु मंत्र की शक्ति
Indexed as PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how Holy Chanting at a moment of panic helps a person overcome distress. The memoir shows the power behind Holy Chanting.

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प्रभु मंत्र की शक्ति

मैं, मेरा साला एवं तीन दोस्‍त माता श्री वैष्णोदेवी के दर्शन के लिए जयपुर से गये थे । हमने माता रानी के दर्शन किये और फिर वहाँ से 50-60 किलोमीटर दूर स्थित शिवखोडी में प्रभु श्री शिवजी के दर्शन के लिए बस से रवाना हुये ।

हम पांच जनो के अलावा अन्‍य यात्रीयों के साथ बस में वाराणसी से आठ लोगों का एक ग्रुप भी था । उसमें से एक व्‍यक्ति जो लगभग 35 वर्ष का था वह अचानक जोर-जोर से ताली बजाने लगा । हमने उसे शान्‍त करने के लिए प्रभु नाम के जयकारे लगाये जिससे वह शान्‍त हो गया । हमने भी उस वाक्‍या को अनदेखा कर दिया ।

इतने में उस व्‍यक्ति ने बस की खिड़की खोली और अपना सिर खिड़की के बाहर लटका दिया । फिर वह खिड़की से निकलने का प्रयास चलती बस में करने लगा । उसका आधा शरीर खिड़की से बाहर निकल भी चुका था ।

हमने बस रूकवाई और उसे भीतर खींचा । उस समय ठंड का मौसम था फिर भी उस ठंड में वह पसीने से तर हो गया । उसके मुंह से झाग और लार निकल रहे थे । वह बेहोश हो गया ।

बस में बैठे सभी घबरा गये । मुझे प्रभु पर विश्‍वास था और ऐसी अवस्‍था में श्री हनुमान चालिसा जी के प्रभाव को मैं जानता और मानता था ।

मैनें तुरंत पूरी श्रद्धा से श्री हनुमान चालिसा जी का पाठ किया और उस व्‍यक्ति को मंत्र की फूँक मारी । प्रभु की साक्षात कृपा के दर्शन हम सभी को हुये जब वह मात्र 2 मिनट के अन्‍तराल में ठीक होकर बैठ गया । प्रभु ने संकट में उस व्‍यक्ति की रक्षा की, ऐसा हम सभी ने अनुभव किया ।

श्री हनुमान चालिसा जी में मेरी जो श्रद्धा थी वह इस घटना के बाद और भी बढ गई । संपादक टिप्पणी - श्री हनुमान चालिसा जी का प्रभाव जगत विख्‍यात है और विपदा में इनका उपयोग असंख्‍य लोगों ने किया है और अपने श्रद्धानुसार उसका फल पाया है ।

रोशन लाल महेश्‍वरी
जयपुर


नाम / Name : Mr Roshan Lal Maheshwari
प्रकाशन तिथि / Published on : 19 February 2017

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 38 वर्ष की है और मैं जयपुर का निवासी हूँ । मैं नीलम, माणक, पन्‍ना, पुखराज आदि नगिनों की छटाई का कार्य करता हूँ ।
प्रभु में मेरी पूरी आस्‍था है और मैं सभी देवों को मानता हूँ क्‍योंकि ईश्‍वर एक हैं और उनके रूप अनेक हैं ।
परिवार में माता-पिता, चार भाई, पत्‍नी और दो बच्‍चे हैं ।
70 Real-life memoir by Mr Roshan Gupta titled विपत्ति में प्रभु संम्‍भालते हैं
Indexed as TRAVEL MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how faith in GOD saves a teacher to overcome difficult and testing times in the holiday trip of school children. Thrice he faced difficulty in the trip and sought the intervention of GOD and due to his faith in GOD, help was always ready.

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विपत्ति में प्रभु संम्‍भालते हैं

मेरे विद्यालय के बच्चों के साथ लोनावला, महाबलेश्वर (महाराष्ट्र) के सात दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर जाना हुआ । हमारे दल में करीब 200 विद्यार्थी एवं 17 शिक्षक शामिल थे । सभी के मध्य बच्चों को बराबर बाँट दिया गया था ताकि सभी का बराबर ध्यान रखा जा सकें । प्रभु इच्छा से मैं अब नित्य प्रभु श्रीहनुमानजी के चालिसा का पाठ, प्रभु की कथा का श्रवण एवं मंदिर जाता हुँ । विपरीत परिस्थितियों में प्रभु किस प्रकार सहायता करते है इसके तीन जीवंत उदाहरण इस भ्रमण के दौरान देखने को मिले ।

भ्रमण के दौरान ट्रैन से जाना तय हुआ था । सभी ने अपने अपने ग्रुप के बच्चों को संभाला एवं ट्रैन में उनके निर्धारित स्थान पर बैठा दिया । मेरे साथ यह परेशानी आयी कि मेरे आधे बच्चे कोच के एक कोने में थे एवं आधे दूसरे कोने में । जिन्हें संभालना काफी कठिन था । प्रभु कृपा से एक अन्य विद्यालय का ग्रुप भी लोनावला ही जा रहा था अतः उनके साथ सामंजस्य बैठाकर मैंने अपने सभी बच्चों को एक साथ कर लिया । दिन पुरी तरह ठीक निकला, रात होते ही मैंने अपने बच्चों को सुला दिया । रात करीब 12 बजे जिस ग्रुप से हमने सीट बदली उसके शिक्षक ने आकर उठाया और कहा कि आपने जो सीट हमें दी है उस पर कोई और सज्जन आ गये हैं । मेरे कोच में मैं अकेला ही शिक्षक था । टी.टी. ने भी सीट दुसरे के ही नाम होना बताया । मैंने उन शिक्षक महोदय से तकलीफ हेतु क्षमा मांगी एवं तुरंत एक सीट खाली करके उन्हें उपलब्ध करवायी एवं अपने ईंचार्ज को सुचित किया । थोडी देर बाद पुनः उन्हें उपलब्ध करवाई सीट पर कोई ओर सज्जन आ गये । फिर क्षमा मांग कर उन्हें एक सीट दी । ऐसा चार बार हुआ । अब उनके शिक्षक का भी धैर्य जवाब देने लगा, जो कि जायज भी था । उन्होंने कहा कि सर आपने ऐसा कैसा आरक्षण करवाया है । मुझे भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा था । तभी इंचार्ज ने बताया कि हम लोगों ने अन्य कोच की कुछ सीट कैंसल करवाने डाली जिसे ऑपरेटर ने गलती से मेरी सीटों को कैंसल करवा दिया हैं अतः कुछ ओर सीटों पर अन्य लोग आ सकते हैं । अत्यधिक तनाव के क्षण होने से मेरी हालत पहले ही काफी खराब थी । मैं पहले ही अपनी सीट तक दे चुका था । इंचार्ज को बोलकर तुरंत चार बच्चों को अन्य कोच में शिफ्ट करवाया । परन्तु बार बार के हंगामों से अब मेरी हिम्मत ने जवाब दे दिया था । एक तरफ भयंकर नींद आ रही थी, सिर फटा जा रहा था और दूसरी और फिर आने वाले तनाव की चिंता थी । मैंने तुरंत प्रभु को याद किया और प्रार्थना की कि हे प्रभु, अब आप ही मुझे बचा सकते है, आप ही रक्षा करें । प्रभु से प्रार्थना करते करते कब नींद आ गई पता ही नहीं चला । सुबह तक किसी ने नहीं उठाया । सुबह उठा तो पता चला कि बाद में कुछ भी नहीं हुआ, जबकि फिर हंगामा होना था ये बात सौ प्रतिशत तय थी । पर मेरे प्रभु ने सब कुछ संभाल लिया और आने वाले मुसीबत से मुझे पुरी तरह उबार लिया । संपादक टिप्पणी - हम जब प्रभु में आस्था रखकर विपत्ति में अपनी बागडोर प्रभु को संम्भला देते हैं तो हम फिर निश्चिंत होकर चैन की नींद सो सकते हैं जैसा कि यहाँ देखने को मिलता है ।

रात्री विश्राम के दौरान बच्चे अपने अपने कमरों में मस्ती करते रहते थे । एक रात मेरे ग्रुप के दो बच्चों में अचानक झगड़ा हो गया और एक बच्चे ने दुसरें का हाथ पुरी तरह मोड़ कर उलटा कर दिया । उसके मुड़े हाथ को देखकर मेरे होश उड़ गये । इतनी रात, घने जंगल के बीच अनजान जगह मैं क्या करुं, कुछ समझ में नहीं आ रहा था । समस्या अति गंभीर थी एवं उस बच्चे की संपूर्ण जिम्मेदारी मेरी ही थी । मैंने मन ही मन तुरंत प्रभु को याद किया एवं बचाव के लिये चिल्लाना प्रारंभ किया । चंद सेकंड में ही एक साथी शिक्षक आ गये ओर उन्होंने ना जाने कैसे उस बच्चे को तुरंत ठीक कर दिया । मेरा मन जानता था कि साथी शिक्षक को प्रभु ने निमित्‍त बनाकर भेजा जिन्होंने लगभग टूटा हाथ तक जोड़ दिया । संपादक टिप्पणी - विपत्ति में हम श्रद्धा रखकर जब प्रभु को पुकारते हैं तो प्रभु किसी को निमित्‍त बनाकर सहायता तत्काल हम तक पहुँचा देते हैं ।

भ्रमण का आखिरी दिन था, हमें ट्रैन से वापिस आना था । मैंने अपने सारे बच्चों को गिना एवं स्टेशन के बाहर से अंदर की ओर ट्रैन के पास ले गया । ट्रैन आते ही सबको बैठाया और फिर से गिनती करी तो होश उड गये, दो बच्चे गायब थे । मैंने तुरंत सब जगह ढुंढा पर कहीं नहीं मिलें । फिर बदहवास होकर बाहर की ओर दौड़ लगाई करीब दो किलोमिटर तक दौड़ लगाकर उन्हें सब जगह ढुंढता रहा, पर नहीं मिलें । कोई सहायता करने को तैयार नहीं था । मैंने फिर प्रभु को याद किया कि हे प्रभु, अब आप ही मेरी सहायता करें । थक कर पसीने में चूर वापस ट्रैन में कोच के पास आया तो दोंनो बच्चे अपने सीट पर खेलते मिले । संपादक टिप्पणी - हमारे नियंत्रण में कुछ नहीं होता जबकि प्रभु के नियंत्रण में सदैव सब कुछ होता है । इसलिए जब हम किसी परिस्थिति से नियंत्रण खो दें तो तत्काल श्रद्धा रखकर प्रभु को पुकारना चाहिए ।

मेरे प्रभु ने सारी की सारी विपदाओं में मेरी रक्षा की, जबकि मैं सब परिस्थितियों में हिम्मत हार चुका था । मैंने अपने आपको पूरी तरह प्रभु को समर्पित कर दिया था । सुख और दुख दोनों ही जीवन का हिस्सा हैं पर अगर प्रभु साथ होते हैं तो वे आपको बुरी से बुरी परिस्थितियों से भी आसानी से निकाल लाते हैं । संपादक टिप्पणी - जीवन में भक्ति करके अगर सदैव प्रभु को याद रखा जाये तो विकट चुनौती को भी हम सफलता से पार कर सकते हैं ।

रोशन गुप्ता
इन्दौर


नाम / Name : Mr Roshan Gupta
प्रकाशन तिथि / Published on : 29 January 2018

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरा नाम रोशन गुप्ता है एवं मैं एक निजी विद्यालय में शिक्षक हुँ । मेरे जीवन का एकमात्र उद्देश्य केवल और केवल प्रभु की भक्ति करना है ।
मुझे सत्‍संग प्रिय है और एक वेबसाईट के माध्यम से मैं प्रभु के कार्य से जुडा हुआ हूँ ।
मैं प्रभु के किसी भी कार्य से जुड़ने में अपना सौभाग्य मानता हूँ और प्रभु से अरदास करता हुँ कि प्रभु की सेवा का अवसर सदैव जीवन में उपस्थित होता रहे ।