श्री गणेशाय नम:
Devotional Thoughts
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MEMOIR LANGUAGE SENDER'S NAME EDITOR'S INTRODUCTION
51 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Smt Vimla RamNarayan Charkha This memoir shows how an auspicious desire is fulfilled instantly by Almighty GOD. If we take a step forward towards GOD, He takes care of the rest.
52 BUSINESS MEMOIR HINDI Mr Ram Babu Vijay This memoir shows how upkeep of firm faith in GOD and asking GOD to lead the way makes a great banking career from a position of nothing.
53 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Mr BalKishan Soni This memoir shows how GOD, the Almighty helps a person during a pilgrimage tour and fulfills his desire much more than expected by the person.
54 ACCIDENT MEMOIR HINDI Smt Mandankini Ashok Aasawa This memoir shows how GOD saves a family in an accident. In severe accident all the family members escape scratch less.
55 MEDICAL MEMOIR HINDI Mr Ram Babu Vijay This memoir shows how upkeep of faith in Almighty GOD brings an end to a distress situation of a lady. The doctors suggested operation but GOD had other means to cure.
56 MEDICAL MEMOIR HINDI Mr Shiv Prasad Toshniwal This memoir shows how upkeep of faith in Almighty GOD and chanting of sacred texts turns a distress situation into a normal one. The doctors were surprised and accepted the miracle.
57 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Smt Sulochana Ghanshyam Jhawar This memoir shows how GOD answers a prayer of a lady for admission of her grandson in an esteemed college. This memoir is unique because it shows that even in small matters if we seek GOD we will find His kindness and mercy.
58 MARRIAGE MEMOIR HINDI Smt Kalavati Kabra This memoir shows how upkeep of faith in Almighty GOD in a situation where there is a marriage planned 21 days ahead and a business loss occurs. GOD sends help which retrieves the situation.
59 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Mr BalKishan Soni This memoir shows how a relationship can be developed between a devotee and Almighty GOD. Both wants to stay with each other.
60 PILGRIMAGE MEMOIR HINDI Brahmachari Ajay Sureka This memoir shows how Holy cow blesses us as mother and leads closer to Almighty GOD. Lord Shri Krishna in his incarnation loved to serve the Holy cow.
Serial No. Post
51 Real-life memoir by Smt Vimla RamNarayan Charkha titled प्रभु द्वारा इच्‍छा की पूर्ति
Indexed as (1) PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how an auspicious desire is fulfilled instantly by Almighty GOD. If we take a step forward towards GOD, He takes care of the rest.

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प्रभु द्वारा इच्‍छा की पूर्ति

श्री वृंदावन धाम में श्रीमद भागवतजी की कथा हो रही थी एवं स्‍वर्गाश्रम (ऋषिकेश) में भी श्रीमद भागवतजी के दशम स्‍कन्‍द की कथा का आयोजन था ।

मुझे कथा सुनने की प्रबल इच्‍छा थी और साथ ही श्री वृंदावन धाम में श्री गिरीराजजी एवं ऋषिकेश में श्री गंगा माता के दर्शन की इच्‍छा थी ।

पर पहले कोई प्रोग्राम नहीं था इसलिए टिकट नहीं बनाई थी । ऐन मौके पर जाने की इच्‍छा प्रबल हुई तो मैंने मेरी भांजी को फोन किया जो की वहाँ जा रही थी । मैंने मेरी प्रबल इच्‍छा बतलाई तो प्रभु की साक्षात कृपा के दर्शन मुझे हुये जब मेरी भांजी ने कहा कि मेरे पास एक टिकट अधिक है क्‍योंकि जिनको मेरे साथ उस टिकट पर जाना था उनका प्रोग्राम रद्द हो गया है ।

मेरी भांजी के यहाँ से मेरे गांव कोई गाडी आ रही थी तो मेरी भांजी ने कहा कि आप तुरंत तैयार हो जाओ और गाडी जब वापस आये तो उसमें बैठ कर आ जाना । मुझे ऐसा लगा मानो प्रभु ने घर पर गाडी भेज कर मुझे घर से ले जाने की एवं आगे की पूरी व्‍यवस्‍था कर दी हो ।

हम श्री वृंदावन धाम पहुँचे । वहाँ तीन दिन रूके एवं श्री गिरीराजजी की परिक्रमा की । फिर स्‍वर्गाश्रम (ऋषिकेश) पहुँचे और माता गंगा के दर्शन किये और प्रभु कथा का श्रवण किया ।

जो संकल्‍प मन में किया था उसे इस तरह प्रभु ने पूरा करा दिया ।

इस यात्रा की एक और घटना मैं बताना चाहती हूँ जहाँ प्रभु ने साक्षात मेरी रक्षा की । मथुरा रेलवे स्‍टेशन पर मैं रेल पटरी पार कर रही थी की अचानक गिर गई । उसी समय पीछे से उसी पटरी पर रेलगाडी आ रही थी । मैं तो एकदम घबरा गई । मेरा चश्‍मा गिर गया था और मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था । प्रभु ने साक्षात रक्षा करी और मुझे उस विपत्ति से बचाया ।

मैंने श्री गिरीराजजी प्रभु एवं श्री गंगा माता के दर्शन की इच्‍छा की और प्रभु कथा सुनने की इच्‍छा की और तत्‍काल प्रभु ने बुलावा भेजा । आधे घंटे में ही घर पर गाडी लेने आ गई और आधे घंटे में आनन फानन में तैयारी करके मैं रवाना हो गई ।

प्रभु सात्विक संकल्‍प तत्‍काल पूरे करते हैं यह अनुभूति हुई और पूरे प्रसंग में प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन मैंने किये । संपादक टिप्पणी - कोई भी सात्विक संकल्‍प हमारे मन में आता है तो उसे पूरा करने में प्रभु देर नहीं करते । हमारा काम है सात्विक संकल्‍प मन में लाना, उसे पूरा करने का काम प्रभु तत्‍काल करते हैं ।

श्रीमति विमला रामनारायण चरखा
वासीम-महाराष्‍ट्र


नाम / Name : Smt Vimla RamNarayan Charkha
प्रकाशन तिथि / Published on : 24 April 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 60 वर्ष की है । मेरे परिवार में दो बेटे हैं जो हमारे साथ रहते हैं ।
हमारे परिवार पर प्रभु का अनुग्रह सदैव रहा है और प्रभु की भक्ति हमारे परिवार में सदैव होती रही है । इसलिए प्रभु हमारी सभी इच्‍छाओं की पूर्ति करते हैं ।
मैंने प्राय: प्राय: सभी तीर्थो के दर्शन कर लिये हैं और सत्‍संग का जहाँ भी मौका मिलता है उसका लाभ लेती हूँ ।
52 Real-life memoir by Mr Ram Babu Vijay titled प्रभु ने जीवन को दिशा दी
Indexed as (1) BUSINESS MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how upkeep of firm faith in GOD and asking GOD to lead the way makes a great banking career from a position of nothing.

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प्रभु ने जीवन को दिशा दी

बात 1967 की है । मैं जहाँ रहता था वहाँ बीकॉम से आगे की पढाई नहीं थी और मुझे एमकॉम करना था । इसलिए नौकरी लगने पर भी इस्‍तीफा देकर मैंने भोपाल जाकर दाखिला लिया । रहने के लिए होस्‍टल मिल गया ।

सब कुछ की व्‍यवस्‍था करने के बाद मेरे पास कुल 5 रूपये बचे थे । मुझे भोपाल जाने से पहले सभी रिश्तेदारों ने समझाया था कि सरकारी नौकरी छोडकर आगे पढने के लिए मत जाओ पर मैं प्रभु के भरोसे चला गया ।

भोपाल में होस्‍टल के पास श्रीलक्ष्‍मीनारायण प्रभु का मंदिर था जहाँ दर्शन हेतु मैं रोजाना जाता था ।

जब पांच रूपये बचे तो विचार आया की अब गुजारा कैसे होगा । खाने की व्‍यवस्‍था कैसे होगी ।

मेरे गुरू ने मुझसे कहा था कि जीवन में जब भी लगे की तुम नितान्‍त अकेले हो और सहायता करने वाला कोई नहीं तो प्रभु को पिता मानकर याद करना । संपादक टिप्पणी - प्रभु को श्रद्धा से पिता मानकर अकेलेपन में याद करने पर प्रभु हमारी अंगुली पकड लेते हैं ।

मैंने पहले स्‍नान किया फिर धुप जलाकर प्रभु के महाभारतजी के सारथी स्‍वरूप का ध्‍यान किया । मैंने प्रभु से कहा की मेरा शरीर रथ, इंद्रिया घोडे, बुद्धि सारथी है इसलिए अब प्रभु आप कृपा करके मेरी बुद्धि को अपने शरण में ले लेवें । मेरे रथ को सही दिशा देवें एवं मेरा साथ देवें । संपादक टिप्पणी - जीवन रथ को प्रभु के हवाले कर देने से वह कही भी अटक नहीं सकती । प्रभु उसे बहुत सरलता से पार लगा देते हैं । मैंने श्रीमद भगवत गीताजी के 12 वे अध्‍याय का पाठ किया ।

फिर होस्‍टल में जब खाना खाकर लेटा तो एकाएक प्रेरणा हुई की नौकरी के लिए आवेदन करो । मैंने अस्‍थाई नौकरी के लिए कुछ बैंक में आवेदन किया और साईकिल पर आवेदन लेकर स्‍वयं बैंक गया ।

जब मैं एक बैंक में पहुँचा तो वहाँ के मैनेजर ने मेरा आवेदन पढकर कहा कि हमारे यहाँ एक पद रिक्‍त है पर क्‍योंकि आप मेरे जाति भाई हो इसलिए मैं नहीं रख सकता क्‍योंकि मेरे उपर अंगुली उठ जायेगी । उन्‍होनें दूसरे बैंक का नाम बताया और कहा की वहाँ जाओ और मेरा नाम लेकर कहना तो आपका काम हो जायेगा । मैं दूसरे बैंक पहुँचा तो वहाँ के मैनेजर ने कहा कि हमारे यहाँ 15 दिन हेतु स्‍थान रिक्‍त है । मैं वापस उस पहले वाले बैंक के मैनेजर को धन्‍यवाद देने गया ।

तभी वहाँ एक परिचित मिले जिन्‍होंने पुछा की कैसे आये हो । जब मैंने उन्‍हें पूरी बात बताई तो उन्‍होंने कहा कि मैं यहाँ संघ का सचिव हूँ और तुम्‍हें इसी बैंक में ज्‍यादा अवधि की नौकरी दिलाउगां । प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन मुझे हुये ।

उन्‍होंने उस बैंक के मैनेजर से बात की जिसने मुझे जाति भाई के आधार पर मना कर दिया था । शाम को 6 बजे टाईप हुआ नियुक्ति पत्र मुझे मिल गया जिसमें मुझे 9 महिने के लिए अस्‍थाई नौकरी मिल गई ।

यह प्रभु की असीम कृपा थी । नौ महिने में काफी पैसे इकठे हो गये जिससे सुचारू पढाई पूरी कर ली ।

फिर प्रभु कृपा से मुझे उसी बैंक में स्‍थाई नौकरी मिल गई और मैंने 38 वर्ष तक बैंक की नौकरी की ।

प्रभु से पिता रूप में मांगा मार्गदर्शन को प्रभु ने निभाया और राह दिखाई । प्रभु ने उस समय कृपा की जब मेरे पास मात्र पांच रूपये ही शेष बचे थे । संपादक टिप्पणी - प्रभु जब कृपा करते हैं तो शुन्‍यता से निकाल कर परिपूर्णता की तरफ ले जाते हैं ।

राम बाबु विजय
उज्‍जैन


नाम / Name : Mr Ram Babu Vijay
प्रकाशन तिथि / Published on : 01 May 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 66 वर्ष की है । मैनें M.Com,LLB एवं CAIIB किया है । मैनें ज्‍योतिषाचार्य का अध्‍ययन भी किया है ।
मैंने बैंक की 38 वर्ष सन 1969 से 2008 तक नौकरी की और मुख्‍य प्रबंधक के पद से सेवानिवृत हुआ ।
परिवार में पत्‍नी, एक लड़का एवं दो लड़किया हैं । मैनें सारे र्तीथों के दर्शन कर लिये हैं एवं सत्‍संग मुझे प्रिय है । जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है मैं उसका लाभ लेने के लिए जाता हूँ ।
53 Real-life memoir by Mr Balkishan Soni titled र्तीथ में प्रभु कृपा
Indexed as (1) PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how GOD, the Almighty helps a person during a pilgrimage tour and fulfills his desire much more than expected by the person.

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र्तीथ में प्रभु कृपा

एक बार श्री बद्रीनाथ धाम के यात्रा के समय की यह घटना है ।

प्रभु के बालरूप में श्री लड्डुगोपाल जी (श्री लालाजी) की सेवा मैं करता हूँ और प्रभु का विग्रह और प्रभु की सेवा हमेशा मेरे साथ चलती है ।

श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा हेतु ऋषिकेश से बस की टिकट बुक कराई । श्री लालाजी भी हमारे साथ थे । बस सुबह चार बजे रवाना होनी थी । पर किसी खराबी के कारण बस आई नहीं और मैं बस के इंतजार में विचलित हो उठा क्‍योंकि अगर समय से बस रवाना नहीं हुई तो हम शाम तक जोशीमठ नहीं पहुँच सकते थे और गेट बंद हो जाने के करण आगे श्री बद्रीनाथजी की यात्रा को नहीं जा सकते थे ।

मैंने श्री लालाजी को कहा कि अब आप कृपा करेंगे तभी दर्शन हो पायेंगे । फिर क्‍या था । प्रभु ने पुकार सुनी और नई बस पहुँची और हम सुबह सात बजे ऋषिकेश से रवाना हुये । इससे अधिक विलम्‍ब होता तो हम शाम चार बजे तक जोशीमठ नहीं पहुँच पाते और गेट बंद हो जाता । गेट बंद हो ही रहा था की बस वाले ने बड़ी वेग से बस को गेट के अंदर पहुँचाया ।

मैं दूसरे दिन प्रात: श्री बद्रीनाथ धाम में था । प्रभु ने मेरी इच्‍छा पूरी करवा दी पर अभी प्रभु की और कृपा होनी बाकि थी ।

श्री बद्रीनाथ प्रभु के अभिषेक के समय वहाँ के एक अन्‍जान पंडितजी ने मेरे साथ के श्री लालाजी के विग्रह को उठाया और मंदिर के भीतर ले गये । उन्‍हें प्रभु ने ऐसी प्रेरणा दी की उन्‍होंने कहा कि अभिषेक पूरा होने तक श्री लालाजी वहीं रहेंगे और मुझे भी उन्‍होंने श्री लालाजी के साथ वही पर बैठा दिया ।

मैंने पूरा अभिषेक अपनी आँखों से देखा और इतने करीब से इतने लम्‍बे दर्शन प्रभु के पाकर मैं धन्‍य हो गया ।

मैंने तो सिर्फ श्री लालाजी से श्री बद्रीनाथ धाम पहुँच जाऊ, ऐसी इच्‍छा प्रकट की थी जब ऋषिकेश में समय से बस नहीं आई थी ।

पर प्रभु ने न केवल मुझे सही समय पर श्री बद्रीनाथ धाम पहुँचया अपितु इतने दुर्लभ दर्शन इतने समीप से करवाये । संपादक टिप्पणी - सच्‍चे अन्‍तकरण की हमारी सात्विक पुकार प्रभु अवश्‍य सुनते हैं - यह एक शाश्‍वत सत्‍य एवं शाश्‍वत सिद्धांत है ।

सच्‍चे मन से हम प्रभु से कुछ मांगते हैं तो उससे कही ज्‍यादा की पूर्ति प्रभु करते हैं । प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन इस प्रसंग में मैंने किये ।

बालकिशन सोनी
इच्‍छलकरणजी


नाम / Name : Mr Balkishan Soni
प्रकाशन तिथि / Published on : 08 May 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मैं 78 वर्ष का हूँ । मेरा कपडे का व्‍यवसाय है । परिवार में तीन लड़के और दो लड़कियां एवं पत्‍नी है ।
मेरा काफी समय सत्‍संग में बीतता है एवं मैनें प्राय: सभी तीर्थो की यात्रा कर ली है ।
सत्‍संग में मेरी विशेष रूची है एवं वर्ष में छ: महिने मैं धार्मिक आयोजनों का लाभ लेने हेतु घर से बाहर तीर्थो में रहता हूँ ।
54 Real-life memoir by Smt Mandankini Ashok Aasawa titled दुर्घटना में रक्षा
Indexed as (1) ACCIDENT MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how GOD saves a family in an accident. In severe accident all the family members escape scratch less.

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दुर्घटना में रक्षा

मेरे बहु के गुर्दे का ऑपरेशन हुआ था । हर महिने जांच और आगे के ईलाज के लिए हमें पूना जाना पडता था ।

जब हम अपने शहर कोल्‍हार से पूना डाक्‍टर को दिखाने जाते थे तो नियमपूर्वक राजनगांव स्थित श्री अष्‍ट विनायक गणपतिजी के मंदिर के दर्शन करते थे ।

एक बार की बात है । गाडी में मेरे पति, मेरा बेटा, मेरी बहु को डाक्‍टर को दिखाने पूना जा रहे थे । बीच में उनकी गाडी जोरदार दुर्घटनाग्रस्‍त हुई । एक ट्रक ने पीछे से आकर जोरदार टक्‍कर मारी । गाडी टक्‍कर के कारण पीछे से एकदम चिपटी हो गई पर प्रभु के साक्षात कृपा के दर्शन हुये कि हमारे परिवार के तीनो जनों को खरोंच तक नहीं आई । प्रभु ने उनका बाल भी बांका नहीं होने दिया ।

हमें साक्षात अनुभव हुआ कि नियमस्‍वरूप हमेशा पूना जाते वक्‍त प्रभु के दर्शन के लिए रूकते थे और आज विपत्ति के समय प्रभु ने कैसे हमारी रक्षा की ।

टक्‍कर के कारण गाडी पीछे से इतनी बुरी तरह से चिपटी हो गई थी कि उसे देखकर यह मानना मुमकिन नहीं था कि इसमें बैठे किसी को चोट नहीं आये । उसमें बेठे लोगों को चोट नहीं आये यह असंभव प्रतित होता था । पर जब प्रभु रक्षा करते हैं तो असंभव भी संभव हो जाता है । संपादक टिप्पणी - प्रभु पर दृढ विश्‍वास रखने पर विपत्ति में रक्षा की जिम्‍मेवारी प्रभु की बन जाती है और प्रभु अपने जिम्‍मेवारी का निर्वाह बखुबी करते हैं ।

गाडी को जो टक्‍कर लगी थी वह इतनी जोरदार थी कि गाडी को ठीक करवाने में लाखों का खर्च आया ।

श्रीमति मंदाकिनी अशोक आसावा
कोल्‍हार भगवती (अहमदनगर-महाराष्‍ट्र)


नाम / Name : Smt Mandankini Ashok Aasawa
प्रकाशन तिथि / Published on : 15 May 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 61 वर्ष की है । परिवार में दो लडके-बहु और 2 पोतियां हैं जो साथ रहते हैं ।
प्रभु की श्रद्धा से पूजा-सेवा करना मुझे अच्‍छा लगता है । मैं जो भी सेवा-पूजा करती हूँ वह श्रद्धा से करती हूँ ।
कोल्‍हार में भगवती मंदिर है जिसकी मेरे मान्‍यता है ।
प्राय: सभी तीर्थो के दर्शन मैंने कर लिये हैं । सत्‍संग मुझे अच्‍छा लगता है और जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है, मैं उसका लाभ लेने जाती हूँ ।
55 Real-life memoir by Mr Ram Babu Vijay titled प्रभु ने अरदास सुनी
Indexed as (1) MEDICAL MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how upkeep of faith in Almighty GOD brings an end to a distress situation of a lady. The doctors suggested operation but GOD had other means to cure.

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प्रभु ने अरदास सुनी

घटना तब की है जब बैंक की नौकरी करते हुये मेरा स्‍थानांतरण रतलाम में ट्रेनिंग आफिसर के रूप में हुआ था ।

वहाँ दो दिन तक मेरी पत्‍नी के पेट में बहुत दर्द उठा । डॉक्‍टर को दिखाया तो डॉक्‍टर ने कहा कि बच्‍चेदानी में गडबडी है और उसे ऑपरेशन करके निकालना पडेगा । डॉक्‍टर ने कहा कि आप तुरंत पत्‍नी को अस्‍पताल में भर्ती कराओ ।

पत्‍नी एकदम घबरा गई और जब हम वापस घर पहुँचे तो पत्‍नी रोने लगी । उसके पेट में बहुत दर्द हो रहा था ।

विपत्ति के समय मैंने सदैव की तरह प्रभु को याद किया । मेरी आस्‍था श्री गणपतिजी प्रभु में थी और मैंने उज्‍जैन स्थित श्री चिन्‍तामणी गणपतिजी के मंदिर में जाकर दर्शन किया और प्रभु से विपत्ति निवारण के लिए अरदास की ।

फिर क्‍या था पत्‍नी ने भी प्रभु से मनौती मांगी की मैं ठीक हो गई तो आपके दर्शन के लिए आउंगी ।

उसी रात को पत्‍नी को एक उल्‍टी हुई जिससे उसको काफी राहत मिली और वह रात को सो गई । सुबह उठी तो पूरी तरह से पेट दर्द गायब था ।

हम वापस डॉक्‍टर से मिले तो डॉक्‍टर ने जांच करके कहा कि अब सब ठीक है और ऑपरेशन की अब कोई जरूरत नहीं है ।

कहाँ ऑपरेशन की तैयारी थी और कहाँ बिना ऑपरेशन एक उल्‍टी में ही सब कुछ ठीक हो गया । संपादक टिप्पणी - प्रभु के हाथ बहुत लम्‍बे होते हैं और प्रभु के तरीके अनोखे होते हैं । मेडिकल साईन्‍स की एक तय सीमा पर प्रभु कृपा की कोई सीमा नहीं होती ।

प्रभु ने सब कुछ ठीक कर दिया था और प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन इस प्रसंग में हम पति-पत्‍नी को हुये ।

राम बाबु विजय
उज्‍जैन


नाम / Name : Mr Ram Babu Vijay
प्रकाशन तिथि / Published on : 22 May 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 66 वर्ष की है । मैनें M.Com,LLB एवं CAIIB किया है । मैनें ज्‍योतिषाचार्य का अध्‍ययन भी किया है ।
मैंने बैंक की 38 वर्ष सन 1969 से 2008 तक नौकरी की और मुख्‍य प्रबंधक के पद से सेवानिवृत हुआ ।
परिवार में पत्‍नी, एक लड़का एवं दो लड़किया हैं । मैनें सारे र्तीथों के दर्शन कर लिये हैं एवं सत्‍संग मुझे प्रिय है । जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है मैं उसका लाभ लेने के लिए जाता हूँ ।
56 Real-life memoir by Mr Shiv Prasad Toshniwal titled प्रभु मंत्र का चमत्‍कार
Indexed as MEDICAL MEMOIR


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प्रभु मंत्र का चमत्‍कार

मेरे बहु की प्रसुति के समय की यह घटना है ।

प्रसुति के ठीक पहले उसे काफी परेशनी हो रही थी । ऐन वक्‍त डॉक्‍टरों ने कहा कि अब ऑपरेशन करना पडेगा ।

हम सभी घर वाले घबरा गये पर मुझे प्रभु पर पूरा विश्‍वास था ।

मैंने तत्‍काल श्री गायत्री मंत्र की 5 माला करी और करते वक्‍त अगरबत्‍ती जलाई । माला पूरी होने पर अगरबत्‍ती की राख को लाकर मैंने अपने पुत्रवधु के माथे पर लगाया ।

पांच मिनट बाद ही साधारण प्रसव से पहला बच्‍चा हुआ और उसके आठ मिनट बाद ही दूसरा जुडवा बच्‍चा भी साधारण प्रसव से हुआ ।

दोनों बच्‍चे और मेरी बहु स्‍वस्‍थ थे । उनके उपर से संकट हट चुका था ।

डॉक्‍टर भी आश्‍चर्य चकित थे की यह कैसे संभव हुआ । डॉक्‍टर ने मुझे बुलाकर मेरी पीठ थपथपाई और कहा कि यह चमत्‍कार आपके मंत्र की शक्ति के कारण ही संभव हुआ है । संपादक टिप्पणी - श्री गायत्री मंत्र माता गायत्री का अमोघ और सिद्ध मंत्र है । इसकी शक्ति अदभूत है । विपत्ति निवारण में यह पूर्ण रूप से सामर्थ्‍य है ।

मैंने उसी समय संकल्‍प किया कि इस उपलक्ष्‍य में प्रभु का गुणानुवाद करवाऊगा और 2 महिने बाद हमारे घर पर प्रभु की कथा हुई । उस कथा में प्रभु के जन्‍मोत्‍सव के उत्‍सव में मेरे पोते को प्रभु की बालरूप की झाकी में प्रभु का बालरूप बनाया गया ।

शिव प्रसाद तोषनीवाल
जिन्‍टुर


नाम / Name : Mr Shiv Prasad Toshniwal
प्रकाशन तिथि / Published on : 29 May 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 78 वर्ष की है । मैंने अनाज का व्‍यापार किया और फिर कपडे का व्‍यवसाय किया ।
मेरे परिवार में चार लडके हैं जो मेरे साथ रहते हैं और अब व्‍यापार संभालते हैं । मैं सेवानिवृत हो चुका हूँ ।
मैनें सभी तीर्थों के दर्शन कर लिये हैं और पिछले 18 वर्षो से पूरे वर्ष में एक महिने ऋषिकेश आकर रहता हूँ ।
सत्‍संग मुझे प्रिय है और जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है मैं उसका लाभ लेता हूँ ।
57 Real-life memoir by Smt Sulochana Ghanshyam Jhawar titled प्रभु की मेरे पोते पर कृपा
Indexed as BUSINESS MEMOIR


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प्रभु की मेरे पोते पर कृपा

छोटी छोटी बातों में भी अगर हम प्रभु को पुकारते हैं तो प्रभु कृपा के दर्शन हमें तत्‍काल होते हैं ।

बात जुलाई 2014 की है जब मैं स्‍वर्गाश्रम श्रीमद भगवतजी महापुराण के दसम स्‍कन्‍द की कथा श्रवण हेतु आई हुई थी ।

मेरे पोते का कॉलेज में प्रवेश होना था । मैंने प्रभु से अरदास की और मांगा कि पोते का सबसे अच्‍छे कॉलेज में प्रवेश हो जाये ।

मैं स्‍वर्गाश्रम स्थित श्रीराम मंदिर गई और अपने पोते के लिए प्रभु से आर्शीवाद लिया । फिर प्रेरणा हुई की कुछ माला का जप अपने पोते के लिए किया जाये । मेरे गुरूजी जो प्रभु कथा का वाचन कर रहे थे, मैं उनसे मिलने गई और उनसे माला ग्रहण किया । फिर मैंने माला का जप श्रद्धाभाव से पूर्ण किया ।

फिर क्‍या था प्रभु की अनुकम्‍पा हुई और मेरे पोते को एक बहुत बड़े कॉलेज में दाखिला मिल गया । पोते का फोन आया तो मैं अभिभूत थी की कैसे प्रभु ने चुटकी में इच्‍छा पूर्ति कर दी ।

मैंने प्रभु को पुकारा और प्रभु ने इच्‍छा पूरी करने में देर नहीं लगाई । प्रभु कृपा के साक्षात दर्शन इस प्रसंग में मुझे हुये । संपादक टिप्पणी - प्रभु का सामर्थ्‍य इतना बड़ा है कि प्रभु में विश्वास हो और सच्ची अरदास की जाये तो छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी इच्छा प्रभु चुटकी में पूर्ण करते हैं ।

श्रीमति सुलोचना घनश्‍याम झंवर
जयसिहपुर (कोल्‍हापुर-महाराष्‍ट्र)


नाम / Name : Smt Sulochana Ghanshyam Jhawar
प्रकाशन तिथि / Published on : 05 June 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 70 वर्ष की है । परिवार में तीन बेटे-बहु, पोते-पोती हैं जो सभी साथ रहते हैं ।
मैंने चार धाम की यात्रा, श्री अमरनाथजी के दर्शन, श्री वैष्‍णव देवी के दर्शन और चौरासी कोस की बृज यात्रा की है । इसके अलावा भी अन्‍य प्रमुख तीर्थो के दर्शन मैंने कर लिये हैं ।
सत्‍संग का जहाँ भी मौका मिलता है मैं उसका लाभ लेने के लिए जाती हूँ ।
58 Real-life memoir by Smt Kalavati Kabra titled प्रभु की कृपा से पुत्री का विवाह
Indexed as FAMILY MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how upkeep of faith in Almighty GOD in a situation where there is a marriage planned 21 days ahead and a business loss occurs. GOD sends help which retrieves the situation.

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प्रभु की कृपा से पुत्री का विवाह

मेरे पिताजी ने मेरी शादी डॉक्‍टर से करना तय की ।

मेरी शादी हुई और गृहस्थी अच्‍छी तरह से चली । प्रभु कृपा से जीवन में अच्‍छे दिन देखे और मेरे पति ने डॉक्‍टर की आजीविका से कमाई पूंजी जोडकर एक ऑईल मिल लगाई ।

घटना उस समय की है जब मेरी बेटी की सगाई तय हुई और शादी के लिए 21 दिन बाद का ही सावा निकला । आगे बहुत दिनों तक कोई सावा नहीं था । उसी समय ऑईल मिल में घाटा लगा और स्थिति ऐसी हो गई कि अब शादी हेतु रूपयो की व्‍यवस्‍था कैसे होगी ।

बचपन से ही मुझे प्रभु से जुडने का संस्‍कार मिला था और प्रभु सेवा मैं निरंतर करती आ रही थी । विपत्ति के समय मैंने प्रभु की शरणागति ली । संपादक टिप्पणी - प्रभु से जुडे रहने का संस्‍कार बचपन से होने पर जीवन की किसी भी अवस्‍था में विपत्ति निवारण की जिम्‍मेवारी प्रभु ले लेते हैं ।

प्रभु की ऐसी कृपा हुई कि प्रभु प्रेरणा से मेरे पति के दोस्‍त आगे आये और रूपये दिये और कहा कि जब कमाई हो तो लौटा देना ।

प्रभु ने मेरे पति के दोस्‍तों के माध्‍यम से इतनी मदद भेजी की शादी इतने सुन्‍दर ढंग से हुई की सभी ने उसकी सराहना की । संपादक टिप्पणी - प्रभु संसार को निमित बनाकर हमारे तक सहायता पहुँचाते हैं । सहायता की हर परिस्थिति के पीछे हमें प्रभु के अदृश्य हाथों को देखने की कला आनी चाहिए ।

घाटे के कारण हमारे पास शादी हेतु व्‍यवस्‍था नहीं थी और शादी के लिए समय भी बहुत कम बचा था, फिर भी प्रभु ने तत्‍काल रूपयो की व्‍यवस्‍था करवाई और बड़े सुन्‍दर ढंग से विवाह को अंजाम दिया ।

श्रीमति कलावती काबरा
गंगाखेड (परमनी-महाराष्‍ट्र)


नाम / Name : Smt Kalavati Kabra
प्रकाशन तिथि / Published on : 12 June 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 69 वर्ष की है । मेरे पति डाक्‍टर हैं और परिवार में दो बेटे-बहु और तीन पोती एवं एक पोता है जो साथ रहते हैं ।
प्रभु के बालरूप श्री लड्डुगोपालजी की सेवा करती हूँ ।
प्राय: सभी तीर्थो के दर्शन मैंने कर लिये हैं और सत्‍संग मुझे बहुत प्रिय है । मैं सत्‍संग के बिना नहीं रह सकती इसलिए जहाँ भी सत्‍संग का मौका मिलता है मैं उसका लाभ लेने के लिए जाती हूँ ।
59 Real-life memoir by Mr Balkishan Soni titled प्रभु के साथ-साथ
Indexed as (1) PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how a relationship can be developed between a devotee and Almighty GOD. Both wants to stay with each other.

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प्रभु के साथ-साथ

मैं वल्‍लभ संप्रदाय से हूँ और हमारे यहाँ प्रभु के बालरूप में श्री लड्डुगोपाल जी (श्री लालाजी) की सेवा होती है । निरंतर प्रभु सेवा चलती है और प्रवास के दौरान भी प्रभु विग्रह और प्रभु सेवा साथ चलती है ।

एक बार की बात है । किसी परिचित ने शुकताल में श्रीमद भागवत ज्ञानकथा का आयोजन किया । हमें भी निमंत्रण आया और हम लोगों ने जाने का मानस बनाया ।

पर पत्‍नी श्री लालाजी को प्रवास के दौरान नहीं ले जाना चाहती थी क्‍योंकि प्रभु सेवा में कोई बाधा न पडे । शुकताल हमारे लिए नई जगह थी और नई जगह प्रभु के सेवा की व्‍यवस्‍था सुचारू रूप से नहीं हो पायेगी इस विचार से श्री लालाजी को घर पर ही छोड कर जाने का विचार पत्‍नी ने किया ।

श्री लालाजी ने पत्‍नी की साडी का पल्‍ला खींचा, ऐसी अनुभूति दी । श्री लालाजी साथ जाना चाहते हैं ऐसा आभास हमें हुआ ।

पर फिर भी हम बिना श्री लालाजी को लिए शुकताल के लिए निकल गये । हमारी गाडी 60 किलोमीटर ही पहुँची थी की मेरे बेटे का फोन आया कि जहाँ हो वही गाडी से उतर जाओ क्‍योंकि जो परिचित श्रीमद भगवतजी का आयोजन करवा रहे थे उनकी बहु का देहान्‍त हो गया है और कथा इस कारण स्‍थगित कर दी गई है ।

हमें बात साफ दिखने लगी कि प्रभु को बिना लिये हमने जाने का निश्‍चय किया और प्रभु ने हमें जाने नहीं दिया ।

फिर एक वर्ष बाद वह कथा पुन: आयोजित हुई । इस बार हमने वह गलती नहीं दोहराई और श्री लालाजी को साथ लेकर गये और पूरी कथा का रसास्‍वादन किया ।

प्रभु कृपा का साक्षात अनुभव किया की प्रभु अपने सेवादार के साथ रहना चाहते हैं । प्रभु की भाव से सेवा की जाये तो प्रभु साक्षात विग्रह में वास करते हैं ।

प्रभु साक्षात विग्रह में वास करते हैं इसका एक और छोटा सा अनुभव मैं बताना चाहता हूँ ।

एक गरीब की बेटी की शादी नहीं हो रही थी । उसे हमने श्री लालाजी के दर्शन कराये और उसे प्रभु से प्रार्थना करने को कहा । उसने ऐसा ही किया । फिर एक वर्ष बाद मिली तो कहा कि बेटी की शादी भी हो गई और नाती भी हो गई ।

प्रभु साक्षात रूप में विग्रह में वास करते हैं और पुकार सुनते हैं और कृपा करते हैं । संपादक टिप्पणी - यह बिल्‍कुल सत्‍य तथ्‍य है कि अगर प्रभु की सच्‍चे मन से सेवा की जाये तो प्रभु साक्षात रूप से साथ होने की अनुभूति देते हैं और जीव पर कृपा बरसाते रहते हैं ।

बालकिशन सोनी
इच्‍छलकरणजी


नाम / Name : Mr Balkishan Soni
प्रकाशन तिथि / Published on : 03 July 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मैं 78 वर्ष का हूँ । मेरा कपडे का व्‍यवसाय है । परिवार में तीन लड़के और दो लड़कियां एवं पत्‍नी है ।
मेरा काफी समय सत्‍संग में बीतता है एवं मैनें प्राय: सभी तीर्थो की यात्रा कर ली है ।
सत्‍संग में मेरी विशेष रूची है एवं वर्ष में छ: महिने मैं धार्मिक आयोजनों का लाभ लेने हेतु घर से बाहर तीर्थो में रहता हूँ ।
60 Real-life memoir by Brahmachari Ajay Sureka titled गऊ माता ने कराई प्रभु अनुभूति
Indexed as (1) PILGRIMAGE MEMOIR


Editor's Introduction : This memoir shows how Holy cow blesses us as mother and leads closer to Almighty GOD. Lord Shri Krishna in his incarnation loved to serve the Holy cow.

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गऊ माता ने कराई प्रभु अनुभूति

गऊ विश्‍व की माता है । प्रभु ने श्रीकृष्णावतार में गोपाल बनकर गऊ माता का संरक्षण किया । गऊ माता हमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति करवाती है । गऊ माता की सेवा से जीवन में सुख और समृद्धि आती है क्‍योंकि गऊ माता की सेवा प्रभु की ही सेवा है । गऊ माता की सेवा से जुडे घर में संकट नहीं आयेगा । गौशाला एक तीर्थ स्‍वरूप है ।

घटना 2012 की है । बिकानेर की एक गौशाला में रहने के लिए मैं गया । वहाँ लगभग 475 गऊ माता का निवास था और वहाँ गऊ माता की निष्काम सेवा होती थी । उस गौशाला में बिना दुध देनेवाली गाय थी और उनकी पूर्ण सेवा होती थी इसलिए गऊ माता का पूर्ण आर्शीवाद वहाँ सबको मिलता था ।

प्रभु की ऐसी कृपा हुई कि गौमाता के सानिध्य में गौशाला में रहते हुये मुझे प्रभु की अनुभूति हुई । मैं न ही ध्‍यान करता था और न ही माला जपता था पर फिर भी प्रभु की कृपा मात्र गौशाला में रहने और गऊ सेवा के कारण हुई । संपादक टिप्पणी - प्रभु ने श्रीकृष्णावतार में गौसेवा का आर्दश प्रस्‍तुत किया है । आज के भौतिक युग में बिना दुघ देने वाली गऊ माता का लालन पालन करने वाली गौशाला धन्‍य होती है और एक तीर्थ स्‍वरूप ही होती है और वहाँ पर प्रभु की विशेष अनुकम्‍पा रहती है ।

गऊ माता की सेवा कभी विफल नहीं जाती है । गऊ सेवा भी एक प्रकार की प्रभु की सेवा ही है जिसका फल निश्चित रूप से मिलता है ।

ब्रह्मचारी अजय सुरेखा
काशी


नाम / Name : Brahmachari Ajay Sureka
प्रकाशन तिथि / Published on : 08 July 2015

संक्षिप्त प्रेषक परिचय / Brief Introduction of Sender : मेरी उम्र 48 वर्ष की है । पिछले 21 वर्षो से मैं काशी में रहता हूँ । गऊ सेवा में मेरी विशेष रूची है और गऊ सेवा से मैं जुडा हुआ हूँ ।
10 वर्षो तक मैनें आयुर्वेदिक फैक्‍टरी का संचालन किया । आयुर्वेद की मुझे पूरी जानकारी है ।