श्रीगणेशाय नमः
Devotional Thoughts
Devotional Thoughts Read Articles सर्वसामर्थ्यवान एंव सर्वशक्तिमान प्रभु के करीब ले जाने वाले आलेख, मासिक ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में )
Articles that will take you closer to OMNIPOTENT & ALMIGHTY GOD, monthly (in Hindi & English)
Precious Pearl of Life श्रीग्रंथ के श्लोको पर छोटे आलेख ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
Small write-ups on Holy text (in Hindi & English), every day
Feelings & Expressions प्रभु के बारे में उत्कथन ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
Quotes on GOD (in Hindi & English), every day
Devotional Thoughts Read Preamble हमारे उद्देश्य एवं संकल्प - साथ ही प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर भी
Our Objectives & Pledges - Also answers FAQ (Frequently Asked Questions)
Visualizing God's Kindness वर्तमान समय में प्रभु कृपा के दर्शन कराते, असल जीवन के प्रसंग
Real life memoirs, visualizing GOD’s kindness in present time
Words of Prayer प्रभु के लिए प्रार्थना, कविता
GOD prayers & poems
प्रभु प्रेरणा से लेखन द्वारा चन्द्रशेखर करवा

लेख सार : अगर हम प्रभु की भक्ति करते हैं तो प्रभु से कुछ मांग नहीं करने पर भी प्रभु अन्तर्यामी और सर्वसमर्थवान होने के कारण हमारी हर जरूरत की स्वत: ही पूर्ति करते हैं । प्रभु से कुछ नहीं मांगकर हमें भक्ति में निष्काम बने रहना चाहिए । पूरा लेख नीचे पढ़े -



प्रभु देवें, यह मांग हो गई । प्रभु देंगे, यह विश्वास हो गया । हमें किसी भी चीज की प्रभु से मांग नहीं करनी चाहिए । हमें सदैव निष्काम होना चाहिए । मांग नहीं करने पर भी हमें वह चीज प्रभु से पाने का विश्वास होना चाहिए ।


भक्‍त को सदैव प्रभु पर विश्वास होता है कि प्रभु उसकी हर जरूरत की पूर्ति करेंगे और प्रभु स्वत: करते भी हैं । जैसे एक नवजात शिशु को क्या चाहिए, उसकी कोई मांग नहीं होती पर उसकी माता स्वत: ही समय से पहले उसकी हर जरूरत की पूर्ति करती है । वैसे ही प्रभु अपने भक्तों की हर जरूरत की स्वत: ही पूर्ति करते हैं और वह भी बिना मांगे क्योंकि प्रभु से कुछ भी छिपा हुआ नहीं है और प्रभु सर्वसमर्थवान हैं । उन्हें पता होता है कि किसे कब किस चीज की आवश्यकता है और प्रभु सबको सब कुछ देने में समर्थ हैं ।


प्रभु के एक भक्त श्री नरसीजी मेहता का उदाहरण हम देखेंगे तो यह तथ्य हमें समझ में आ जायेगा । श्री नरसीजी के पास प्रभु कृपा से खूब धन संपत्ति थी । उन्होंने अपनी बेटी का विवाह बड़े चाव के साथ और बहुत कुछ अपनी बेटी को देकर किया । फिर उनके ऊपर भक्ति का रंग चढ़ा और उन्होंने अपना सब कुछ दान कर वन में आकर कुटिया बनाकर रहने लगे और भजन करने लगे । उनकी बेटी की बेटी बड़ी हो गई और उसके विवाह का समय आया । रीति के अनुसार ननिहाल पक्ष से मायरा भरा जाता है । ससुराल वालों को पता था कि श्री नरसीजी के पास कुछ भी नहीं है क्योंकि उन्होंने सब कुछ दान कर दिया था । श्री नरसीजी का मजाक उड़ाने के लिए ससुराल वालों ने एक लंबी सूची मायरे के सामान की एक ब्राह्मण के साथ श्री नरसीजी के पास भेज दी । श्री नरसीजी ने उस पत्री को खोले बिना उसे प्रभु के श्रीकमलचरणों में निवेदन कर दिया । उन्होंने प्रभु से कुछ मांग नहीं की क्योंकि उन्हें विश्वास था कि प्रभु स्वत: ही उनकी जरूरत की पूर्ति करेंगे । अपने इस भक्‍त की लाज रखने के लिए प्रभु को स्वयं आना पड़ा और प्रभु उनकी बेटी के धर्मभाई बनकर मायरा भरने आये । प्रभु ने ऐसा मायरा भरा कि लेने वाले थक गये । भेजी हुई मायरे की सूची से कई कई गुना ज्यादा प्रभु ने दिया । सब तरफ प्रभु की जय जयकार हो गई और श्री नरसीजी का मान बढ़ गया ।


उपरोक्त दृष्टांत से इस बात की पुष्टि होती है कि अगर हम प्रभु से कुछ मांग नहीं करे और प्रभु पर विश्वास रखें तो प्रभु उचित समय जरूरत अनुसार स्वयं ही हमें देंगे । पर जीव प्रभु से मांग करके अपनी भक्ति को दूषित कर लेता है क्‍योंकि सर्वश्रेष्ठ भक्ति तो निष्काम भक्ति ही होती है ।


भक्ति में निष्काम होना भक्ति का बहुत बड़ा गौरव है । निष्काम भक्त प्रभु को सबसे अधिक प्रिय होते हैं । निष्काम भक्ति से ऊँ‍चा साधन कुछ भी नहीं है । इसलिए जीव को चाहिए कि प्रभु देवें, यह मांग नहीं रखे बल्कि प्रभु देंगे, यह पक्का विश्वास रखे ।


प्रभु का श्रीमद भगवद गीताजी में भक्तों का दायित्व उठाने का व्रत लिया हुआ है और प्रभु सदैव ऐसे व्रत का पालन करते हैं । सभी भक्तों के चरित्रों में यह बात देखने को मिलती है ।


इसलिए जीव को चाहिए कि प्रभु पर अटूट विश्वास रखें और प्रभु की निष्काम भक्ति करके अपने मानव जीवन को सफल करे ।


धन्यवाद ज्ञापन

इस वेबसाइट की कोशिश है कि प्रभु के करीब चले | इस कोशिश में जहाँ जहाँ से हमें सहयोग मिला है उसे अभिस्वीकार करते हुए यहाँ दर्ज “विचारों को फैलाने” में जिन्होंने हमें सहयोग दिया है उनका हम सादर आभार प्रकट करते हैं |

प्रकाशन हेतु :
इन्होने प्रभु के बारे में हमारे लेखन का समालोचन करने के बाद प्रकाशन किया | इनके प्रति हमारा हार्दिक आभार | वर्णक्रमानुसार :
SWARGVIBHA.
ब्लॉग हेतु:
लेख ब्लॉग के रूप में यहाँ उपलब्ध हैं | इन सभी ब्लॉग मंच का धन्यवाद | सभी का आभार | वर्णक्रमानुसार :
HINDIBLOGS, HINDIBLOGSPOT, JAGRANJUNCTION.