श्रीगणेशाय नमः
Devotional Thoughts
Devotional Thoughts Read Articles सर्वसामर्थ्यवान एंव सर्वशक्तिमान प्रभु के करीब ले जाने वाले आलेख, द्वै-मासिक ( हिन्दी एंव अंग्रेजी में )
Articles that will take you closer to OMNIPOTENT & ALMIGHTY GOD, bimonthly (in Hindi & English)
Precious Pearl of Life श्रीग्रंथ के श्लोको पर दो छोटे आलेख ( हिन्दी एंव अंग्रेजी में ), प्रत्येक रविवार
Two small write-ups on Holy text (in Hindi & English), every Sunday
Feelings & Expressions प्रभु के बारे में उत्कथन ( हिन्दी एंव अंग्रेजी में ), प्रत्येक बुधवार
Quotes on GOD (in Hindi & English), every Wednesday
Devotional Thoughts Read Preamble हमारे उद्देश्य एवं संकल्प - साथ ही प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर भी
Our Objectives & Pledges - Also answers FAQ (Frequently Asked Questions)
Visualizing God's Kindness वर्तमान समय में प्रभु कृपा के दर्शन कराते, असल जीवन के प्रसंग
Real life memoirs, visualizing GOD’s kindness in present time
Words of Prayer प्रभु के लिए प्रार्थना, कविता
GOD prayers & poems
प्रभु प्रेरणा से लेखन द्वारा चन्द्रशेखर करवा

लेख सार : प्रभु भक्ति की अदभूत शक्ति के दर्शन करवाता लेख | हर परिस्थिती में सदैव दृढ प्रभु भक्ति का आह्रान करता लेख | पूरा लेख नीचे पढ़े -



एक नन्हे दुधमुँहे बच्चे को अर्धनग्न अवस्था में भुखा-प्यासा तपती धुप में अपनी माँ की गोद में भीख मांगने हेतु दया का पात्र बनकर शहर के चौराहो पर भीख मागते आपने अकसर देखा होगा ।


वह नन्हा बच्चा इतना छोटा है, दुधमुहाँ है कि इस जन्म में तो उसने कुछ भी गलत नही किया होगा क्‍योंकि अभी तक उसने जमीन पर स्वतः पैर तक नही रखे, उसके मुँह से वाणी निकलनी भी प्रारंभ नही हुई ।


जरा सोचें उसकी इस दुर्दशा का कारण । या तो पूर्व जन्म / जन्मों में उसने बहुत पापकर्म किये होगें या फिर निश्‍चित ही नगन्य प्रभु-भक्ति की होगी । क्‍योंकि अगर प्रभु-भक्ति करता तो भक्ति में इतनी प्रबल शक्ति होती है कि कई पूर्व जन्मों के संचित पाप भी क्षणभर में काट देती है । प्रभु की कृपा क्षणभर में उतने पाप काटती है जितने पाप हम जन्म-जन्मों में भी संचित नहीं कर सकते।


प्रभु भक्ति की पहली शक्ति है कि वह जन्म-जन्मों के संचित पाप काटती है । प्रभु भक्ति की दुसरी शक्ति है (जो पहली से भी अहम है) कि जीव को उस जन्म में पापकर्म करने ही नहीं देती । क्‍योंकि सच्ची भक्ति हमारी बुद्धि और हृदय को इतनी शुद्ध और निर्मल कर देती है कि हमारी अन्तरात्मा की आवाज हमें गलत कार्य करने के पहले रोक देती है । भक्ति करते करते अन्तरात्मा की आवाज दृढ और साफ सुनाई देने लगती है । अन्तरात्मा की आवाज सुनने और मानने से वह और बुलंद होती चली जाती है । इससे ठीक विपरित अभक्त को अन्तरात्मा की आवाज सुनाई पडनी बंद हो जाती है ।


अन्तरात्मा की आवाज क्या है ? यह सत-वाणी है यानी भीतर बिराजे सतचितानंद की वाणी है जो हमें पूण्यकर्म करने हेतु निरंतर प्रेरित करती है और पापकर्म से बचने के लिए सदा सचेत करती है ।


प्रभु भक्ति का बल देखें कि हमें अन्तरात्मा का दिशानिर्देश प्राप्त कराती रहती है जो अभक्त को कभी नहीं प्राप्‍त होता । भक्ति के कारण अन्तरात्मा की आवाज हमें उस जन्म में पापकर्म करने से रोकती है और भक्ति हमारे पूर्व जन्मों के संचित पापों को भी प्रभु कृपा दिला कर भस्‍म करवा देती है ।


पाप कटते ही हमें मनुष्‍य देह मिलता है और एक अच्छे, गुणशाली और सर्वसम्पन्न कुल में जन्म मिलता है । ऐसे कुल में जन्म मिलने पर और ऐसे जन्म का कारण / रहस्य समझने पर हमें उस जन्म में भी भक्ति की डोर निरंतर पकडे रखनी चाहिए । क्योंकि ऐसी अवस्था में जहाँ भक्ति ने हमारे संचित पापों को प्रभु-कृपा दिला कर क्षय करवाया हो, जिस कारण हमें मानव देह और उत्तम कुल मिला हो, अगर हम फिर से अपनी भक्ति को प्रबल करते हैं, तो उस जन्म में हमारे द्वारा होने वाले पापकर्म से भी भक्ति हमारी रक्षा करती है । भक्ति हमारे अन्तरात्मा की आवाज को प्रबल करती है जो हमें गलत कार्य करने से रोकती है । भक्ति मानव जीवन को परम उँचाई प्रदान कराती है और यहाँ तक की प्रभु-साक्षात्कार भी करवा दती है, जिससे आवागमन से सदैव के लिए मुक्ति मिल जाती है । मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य भी यही है


इसलिए अगर हमारा जन्म प्रतिकुलता में हुआ है (जैसे गरीब परिवार, आभाव इत्यादी) तो हमें उसे सुधारने हेतु, संचित पाप काटने हेतु और अन्तरात्मा की सही आवाज सुनकर अभाव के कारण पापकर्म से बचने हेतु प्रभु-भक्ति करनी चाहिएऔर अगर हमारा जन्म अनुकूलता में हुआ है (जैसे सम्पन्न परिवार, वैभव इत्यादी) तो हमें प्रभु के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन हेतु, इस जन्म में और उँचाईया पाने हेतु (सिद्धांत और जीवनमूल्यो की उँचाई , पूण्यअर्जन से उँचाई , न की कोरी धन-सम्पन्नता की, ऐशो-आराम और शान-शौकत की दिखावटी उँचाई) । और अन्तरात्मा की सही आवाज सुनकर धन-सम्पन्नता के मद में पापकर्म से बचने हेतु प्रभु-भक्ति करनी चाहिए


इस जन्म की प्रतिकुलता में यह मानना चाहिए कि पूर्व जन्मों में प्रभु भक्ति के आभाव के कारण, प्रभु कृपा से वंचित होने के कारण ऐसा हुआ है । इसलिए तीव्र प्रभु भक्ति करके इस जन्म में इस प्रारब्ध को सुधारना चाहिए ।


इस जन्म की अनुकूलता में यह मानना चाहिए कि पुर्व जन्मों में प्रभु भक्ति के प्रभाव के कारण, प्रभु कृपा द्वारा सिंचित होने के कारण ऐसा हुआ है । इसलिए तीव्र प्रभु भक्ति से इस क्रम को बनाये रखना चाहिए ।


दोनों ही अवस्था में प्रभु भक्ति पथ पर चलते रहना ही मनुष्‍य जीवन को सफल और श्रेष्‍ठ बनाने के लिए एकमात्र और सबसे सरल साधन है


धन्यवाद ज्ञापन

इस वेबसाइट की कोशिश है कि प्रभु के करीब चले | इस कोशिश में जहाँ जहाँ से हमें सहयोग मिला है उसे अभिस्वीकार करते हुए यहाँ दर्ज “विचारों को फैलाने” में जिन्होंने हमें सहयोग दिया है उनका हम सादर आभार प्रकट करते हैं |

प्रकाशन हेतु :
इन्होने प्रभु के बारे में हमारे लेखन का समालोचन करने के बाद प्रकाशन किया | इनके प्रति हमारा हार्दिक आभार | वर्णक्रमानुसार :
SWARGVIBHA.
ब्लॉग हेतु:
लेख ब्लॉग के रूप में यहाँ उपलब्ध हैं | इन सभी ब्लॉग मंच का धन्यवाद | सभी का आभार | वर्णक्रमानुसार :
HINDIBLOGS, HINDIBLOGSPOT, JAGRANJUNCTION, SPEAKINGTREE.