श्रीगणेशाय नमः
Devotional Thoughts
Devotional Thoughts Read Articles सर्वसामर्थ्यवान एंव सर्वशक्तिमान प्रभु के करीब ले जाने वाले आलेख, मासिक ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में )
Articles that will take you closer to OMNIPOTENT & ALMIGHTY GOD, monthly (in Hindi & English)
Precious Pearl of Life श्रीग्रंथ के श्लोको पर छोटे आलेख ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
Small write-ups on Holy text (in Hindi & English), every day
Feelings & Expressions प्रभु के बारे में उत्कथन ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
Quotes on GOD (in Hindi & English), every day
Devotional Thoughts Read Preamble हमारे उद्देश्य एवं संकल्प - साथ ही प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर भी
Our Objectives & Pledges - Also answers FAQ (Frequently Asked Questions)
Visualizing God's Kindness वर्तमान समय में प्रभु कृपा के दर्शन कराते, असल जीवन के प्रसंग
Real life memoirs, visualizing GOD’s kindness in present time
Words of Prayer प्रभु के लिए प्रार्थना, कविता
GOD prayers & poems
प्रभु प्रेरणा से लेखन द्वारा चन्द्रशेखर करवा

लेख सार : प्रभु के इतने उपकार हमारे ऊपर हैं कि हमें जीवन भर प्रभु का गुणगान करने का व्रत लेना चाहिए । प्रभु का गुणगान करना वैसे भी हमारे लिये परम मंगलकारी और कल्‍याणकारी है । पूरा लेख नीचे पढ़े -



प्रभु का यश गाने में, प्रभु का गुणगान करने में अपनी बुद्धि, अपनी सामर्थ्य की अंतिम चेष्‍टा निश्चित रूप से लगानी चाहिए । फिर भी असंतुष्टि और अतृप्ति का भाव हमारे मन में रहना चाहिए ।


सभी शास्त्रों ने, ऋषियों ने, संतों ने प्रभु का गुणगान किया है । श्री वेदजी प्रभु का गुणगान करके "नेति-नेति" कहकर शान्‍त हो जाते हैं । प्रभु का पूर्ण रूप से गुणगान करना किसी के लिये भी संभव नहीं है ।


अगर संसार में कोई स्तुति योग्य है तो वह एकमात्र प्रभु ही हैं । अगर पूरी पृथ्वीमाता कागज बन जाये और श्री समुद्रदेवजी का पूरा जल स्‍याही बन जाये तो भी वे अपर्याप्त होंगे प्रभु के लेशमात्र भी गुणों का बखान करने में ।


शास्त्रों में कितनी स्तुतियां प्रभु की विभिन्न ऋषियों, संतों और भक्तों ने की है । श्री विष्णुसहस्त्रनाम रूपी स्तुति श्री भीष्‍मपितामह ने बाणों की शैया पर लेटे लेटे की जब प्रभु उनके अंतिम समय में उन्हें दर्शन देने पहुँचे । प्रभु के एक हजार नामों से उन्‍होंने प्रभु की स्तुति की और फिर उनकी ज्योति प्रभु में समा गई ।


श्रीमद भागवतमहापुराण जी एवं श्रीरामचरित्रमानस जी में एवं अन्य श्रीपुराणों में भी प्रभु की विभिन्‍न स्तुतियां देवताओं, ऋषियों, संतों और भक्तों द्वारा की हुई मिलेगी । प्रभु ने जब श्रीकृष्णावतार एवं श्रीरामावतार धारण किया तो देवताओं ने गर्भ स्तुति भी की है ।


हमें भी प्रभु की स्तुति और प्रभु का गुणगान अपनी बुद्धि और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए । यह भक्ति का एक स्वरूप है । सच्चा भक्त संसार में किसी का गुणगान नहीं करता, वह सिर्फ प्रभु का ही गुणगान करता है । सच्चा भक्त प्रभु की स्तुति करने के बाद भी अतृप्‍त रहता है और वह सोचता है कि मेरी बुद्धि इतनी कम है और प्रभु के सदगुण इतने अधिक हैं कि मैं पूर्णरूप से प्रभु की स्तुति कर पाने की सोचने में भी पूर्णतया असक्षम हूँ ।


श्री ध्रुवजी ने जब प्रभु प्राप्ति के लिए तप किया और प्रभु ने उन्हें दर्शन दिये तो वे प्रभु की स्तुति करना चाहते थे । पर उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल पाया । प्रभु उनके भाव को समझ गये और प्रभु ने अपना शंख उनके कपोल से लगाया जिससे उनके भीतर ज्ञान की जागृति हुई और उन्होंने प्रभु की दिव्‍य स्तुति करी ।


अगर हम स्वयं प्रभु की स्तुति कर पाने में समर्थ नहीं हैं तो भी हमें श्रीग्रंथों में प्रभु की विभिन्न स्तुतियों को पढ़ना चाहिए और जो स्तुति हमें प्रिय लगे उसे याद कर उसका निवेदन रोज पूजा करते वक्त प्रभु के समक्ष करना चाहिए ।


सच्‍चे मन से की गई भावपूर्ण स्तुति से प्रभु भक्त के वश में हो जाते हैं । इसलिए जीवन में प्रभु के गुणगान और प्रभु की स्तुति को अपनी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग बनाना चाहिए ।


प्रभु ने हमें मानव योनि में जन्म दिया है, हमें सांसे दी है और न जाने प्रभु के हमारे ऊपर कितने उपकार हैं । उन सभी उपकारों को ध्यान रखते हुये प्रभु का नित्य गुणगान और प्रभु की नित्‍य स्तुति हमें जीवन में करते रहने का अभ्‍यास करना चाहिए ।


धन्यवाद ज्ञापन

इस वेबसाइट की कोशिश है कि प्रभु के करीब चले | इस कोशिश में जहाँ जहाँ से हमें सहयोग मिला है उसे अभिस्वीकार करते हुए यहाँ दर्ज “विचारों को फैलाने” में जिन्होंने हमें सहयोग दिया है उनका हम सादर आभार प्रकट करते हैं |

प्रकाशन हेतु :
इन्होने प्रभु के बारे में हमारे लेखन का समालोचन करने के बाद प्रकाशन किया | इनके प्रति हमारा हार्दिक आभार | वर्णक्रमानुसार :
SWARGVIBHA.
ब्लॉग हेतु:
लेख ब्लॉग के रूप में यहाँ उपलब्ध हैं | इन सभी ब्लॉग मंच का धन्यवाद | सभी का आभार | वर्णक्रमानुसार :
HINDIBLOGS, HINDIBLOGSPOT, JAGRANJUNCTION.