श्रीगणेशाय नमः
Devotional Thoughts
Devotional Thoughts Read Articles सर्वसामर्थ्यवान एंव सर्वशक्तिमान प्रभु के करीब ले जाने वाले आलेख, मासिक ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में )
Articles that will take you closer to OMNIPOTENT & ALMIGHTY GOD, monthly (in Hindi & English)
Precious Pearl of Life श्रीग्रंथ के श्लोको पर छोटे आलेख ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
Small write-ups on Holy text (in Hindi & English), every day
Feelings & Expressions प्रभु के बारे में उत्कथन ( हिन्दी एवं अंग्रेजी में ), प्रत्येक दिन
Quotes on GOD (in Hindi & English), every day
Devotional Thoughts Read Preamble हमारे उद्देश्य एवं संकल्प - साथ ही प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर भी
Our Objectives & Pledges - Also answers FAQ (Frequently Asked Questions)
Visualizing God's Kindness वर्तमान समय में प्रभु कृपा के दर्शन कराते, असल जीवन के प्रसंग
Real life memoirs, visualizing GOD’s kindness in present time
Words of Prayer प्रभु के लिए प्रार्थना, कविता
GOD prayers & poems
प्रभु प्रेरणा से लेखन द्वारा चन्द्रशेखर करवा

लेख सार : जीवन के हर प्रसंग में प्रभु कृपा के दर्शन करने की कला हमें आनी चाहिए । जितनी जितनी हमारी भक्ति प्रगाढ़ होगी उतनी उतनी प्रभु कृपा हमें सर्वत्र दिखेगी । पूरा लेख नीचे पढ़े -



सच्चा भक्त कभी यह मानने को तैयार ही नहीं होता कि उसमें कुछ पात्रता है या कुछ सामर्थ्य है । वह केवल और केवल प्रभु की अनुकम्‍पा और प्रभु की कृपा का दर्शन सर्वत्र करता है ।


सच्चे भक्‍त की यह निशानी होती है कि उसे सर्वत्र प्रभु कृपा और प्रभु अनुकम्‍पा के ही दर्शन होते हैं । उदाहरण स्वरूप देखें की बीमारी में उस भक्‍त का एक प्रियजन अस्पताल में भर्ती हुआ । उस भक्‍त को डॉक्टर और दवाई पर विश्वास नहीं होगा । वह उन्हें मात्र एक सांसारिक माध्यम मानेगा पर उसे विश्वास सिर्फ और सिर्फ प्रभु की कृपा पर ही होगा । अगर दवाई अपना काम करती है तो वह दवाई या डॉक्टर की कोई उपलब्धि नहीं मानेगा, वह उस दवाई को प्रभु कृपा के रूप में देखेगा । उसका मानना होगा कि प्रभु ने कृपा की और दवाई के माध्यम से रोगी को राहत मिली ।


यहाँ तक कि सच्चे भक्‍त को उसके द्वारा की जाने वाली भक्ति भी प्रभु अनुकम्‍पा का ही फल दिखती है । क्योंकि वह मानता है कि उसकी कोई सामर्थ्य नहीं प्रभु की भक्ति करने की, उसका कोई भाग्य नहीं की प्रभु भक्ति उससे हो पावे, यह तो केवल प्रभु कृपा है कि वह भक्ति पथ पर अग्रसर हो पा रहा है । उसने प्रभु की सेवा की यह भाव भक्त के अंदर कभी नहीं आयेगा बल्कि प्रभु ने सेवा करवाई यानी प्रभु ने अनुकम्‍पा की और उसकी सेवा स्वीकार की, यह भाव उसके भीतर जागृत होगा ।


सब चीजों में, सभी जगह प्रभु कृपा के दर्शन करने की कला भक्‍त को आती है । जैसे जैसे हम प्रभु की कृपा के दर्शन करना सीख जाते हैं वैसे वैसे प्रभु की भक्ति और प्रभु के प्रति हमारा प्रेम बढ़ता जाता है । हम साक्षात हर जगह और हर समय प्रभु कृपा का अनुभव अपने आसपास करते चले जाते हैं ।


बड़ी बात में प्रभु कृपा का अनुभव तो बहुत से लोग कर लेते हैं । उदाहरण स्वरूप कोई व्यक्ति गाड़ी से कहीं जा रहा है और कोई बड़ी दुर्घटना हो गई और वह बाल बाल बच गया तो वह प्रभु की कृपा को मानेगा । पर उसमें और भक्त में फर्क यह है कि भक्त हर छोटी से छोटी चीज में भी प्रभु कृपा के दर्शन करने की क्षमता विकसित कर लेता है ।


प्रभु की कृपा के दर्शन छोटे से छोटे प्रकरण में हमें होने लगे तभी मानना चाहिए कि हमारी भक्ति सिद्ध हुई है । संत और भक्तों की जीवनी में यह बात साफ दिखती है कि हर छोटे, बड़े, अच्छे, बुरे प्रकरण में उन्हें प्रभु कृपा के दर्शन हुये । भक्‍त श्री नरसी मेहताजी का बेटा जवानी में चला गया तो उन्होंने उसमें भी प्रभु कृपा के दर्शन किये । सच्चे भक्त की निशानी यही होती है कि उसे प्रभु कृपा के अलावा कुछ दिखता ही नहीं । हर प्रकरण में वह प्रभु कृपा खोज निकालता है ।


हमें भी हर जगह प्रभु कृपा देखने की दृष्टि विकसित करनी चाहिए । प्रभु कृपा के दर्शन जितना हम करते चले जायेंगे उतनी ही प्रभु कृपा हमारे जीवन में फलती चली जायेगी ।


प्रभु कृपा का सदैव दर्शन करना भक्ति का एक स्वरूप है । हर अनुकूलता और हर प्रतिकूलता में प्रभु कृपा का दर्शन करने की कला हमें आनी चाहिए । सच्चा भक्त प्रभु कृपा को सर्वत्र देखता है और उसके लिए सदैव प्रभु को धन्यवाद देता रहता है ।


धन्यवाद ज्ञापन

इस वेबसाइट की कोशिश है कि प्रभु के करीब चले | इस कोशिश में जहाँ जहाँ से हमें सहयोग मिला है उसे अभिस्वीकार करते हुए यहाँ दर्ज “विचारों को फैलाने” में जिन्होंने हमें सहयोग दिया है उनका हम सादर आभार प्रकट करते हैं |

प्रकाशन हेतु :
इन्होने प्रभु के बारे में हमारे लेखन का समालोचन करने के बाद प्रकाशन किया | इनके प्रति हमारा हार्दिक आभार | वर्णक्रमानुसार :
SWARGVIBHA.
ब्लॉग हेतु:
लेख ब्लॉग के रूप में यहाँ उपलब्ध हैं | इन सभी ब्लॉग मंच का धन्यवाद | सभी का आभार | वर्णक्रमानुसार :
HINDIBLOGS, HINDIBLOGSPOT, JAGRANJUNCTION.