श्रीगणेशाय नमः
Devotional Thoughts
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प्रभु प्रेरणा से लेखन द्वारा चन्द्रशेखर करवा

लेख सार : जीवन में सब कुछ खो देंवे पर प्रभु को कभी नहीं खोना चाहिए । प्रभु जीवन में रहेंगे तो सब खोई चीजें जीवन में वापस मिल जायेगी । पर अगर प्रभु को खो दिया तो हमने सब कुछ खो दिया । पूरा लेख नीचे पढ़े -



एक कहावत है कि अगर आपने रूपया खोया तो कम खोया, अगर आपने स्‍वास्‍थ्‍य खोया तो ज्‍यादा खोया और अगर आपने चरित्र खो दिया तो सब कुछ खो दिया ।


आध्यात्मिक दृष्टि से इसे ऐसे समझना चाहिए । अगर आपने धन खोया तो बहुत कम खोया, अगर आपने स्‍वास्‍थ्‍य खोया तो भी बहुत कम खोया, अगर आपने चरित्र खोया तो भी बहुत कम खोया पर अगर आपने प्रभु को अपने जीवन से खो दिया तो सब कुछ खो दिया ।


ऐसा क्‍यों ? क्‍योंकि धन की चाबी प्रभु के हाथ में है । प्रभु के खजान्‍ची श्री कुबेरजी हैं । मालिक जिसे बोलेगा मुनिम उसी को धन देगा । वैभव की देवी माता लक्ष्‍मी प्रभु की सेवा करती हैं, प्रभु इच्‍छा का अनुगमन करती हैं । जहाँ प्रभु जाते हैं माता वहाँ साथ जाती हैं । श्री नारायण प्रभु की सेवा करने पर लक्ष्‍मी माता स्‍वत: ही जीवन में आ जाती हैं । उन्‍हें अलग से बुलाना नहीं पड़ता । लक्ष्‍मीनारायण के रूप में माता लक्ष्‍मी प्रभु नारायण के साथ स्‍वत: ही आती है । इससे स्‍पष्‍ट है कि धन की चाबी प्रभु के हाथ में है ।


स्‍वास्‍थ्‍य की चाबी भी प्रभु के हाथ में है । दवा हम ले सकते हैं, ईलाज हम करवा सकते हैं पर ईलाज का लगना यानी ईलाज का सफल होना प्रभु के हाथ में होता है । बहुत बड़े डॉक्टर कठीन से कठीन ऑपरेशन करके जब मरीज के परिजन से बात करते हैं तो एक अंगुली ऊपर प्रभु की तरफ इंगित कर देते हैं । उनका संकेत स्‍पष्‍ट होता है कि हमने अपना काम कर दिया है, अब आगे क्‍या होगा यह परमात्‍मा की इच्‍छा । क्‍योंकि ICU में मरीज के जटिल ऑपरेशन के बाद क्‍या होगा यह उन्‍हें भी पता नहीं होता । अच्‍छे भले ठीक हो रहे मरीज चल बसते हैं और अत्‍यन्‍त गंभीर जटिल मरीज चमत्‍कार से ठीक हो जाते हैं । डॉक्टर अक्‍सर देखते हैं कि अच्‍छा भला मरीज चला जाता है और हारा हुआ मरीज ठीक हो जाता है । इसलिए अच्‍छे डॉक्टर अपनी एक अंगुली प्रभु की तरफ करके स्‍पष्‍ट संकेत देते हैं कि ईलाज करना हमारा काम है पर स्‍वास्‍थ्‍य देना प्रभु का कार्य है । इससे यह स्‍पष्‍ट होता है कि स्‍वास्‍थ्‍य की चाबी भी प्रभु के हाथ में है ।


इसी तरह चरित्र की चाबी भी प्रभु के हाथ में होती है । प्रभु कृपा जीवन में रहेगी तो चरित्र का पतन जीवन में होगा ही नहीं । एक स्‍पष्‍ट सिद्धांत है कि अगर जीव प्रभु कृपा जीवन में बनाये रखेंगे तो चरित्र का पतन कभी नहीं होगा । किसी का चरित्र प्रारब्‍धवश पतित हो भी जाता है तो प्रभु का नाम पुन: उसका उत्‍थान कर देता है । संत अजामील जी की कथा इसका जीवन्‍त उदाहरण है । संत अजामील जी एक पंडित थे, नित्‍य पूजन-हवन-भजन किया करते थे । एक गलत दृश्य देखा और पतित हो गये । माता-पिता को घर से निकाल दिया, पत्‍नी को घर से निकाल दिया और वैश्‍याओं के साथ रहने लगे । गांववालो ने उनका बहिष्कार किया और गांव से बाहर कर दिया । एक संत ने उन्‍हें कहा कि अपने अगले पुत्र का नाम नारायण रख देना । उन्‍होंने ऐसा किया और पुत्र का नाम जीवन में पुकारने की आदत बन गई । अन्‍त समय जब यमदूत को देखा तो डर कर पुत्र का नाम पुकारा । प्रभु के दूत आ गये और उन्‍होंने प्रभु का नाम पुकारा है यह कह कर उसे यमदूतों से बचा लिया । वे नर्क जाने से बच गये । फिर उन्‍होंने प्रभु नाम की महिमा जान अपना खोया चरित्र वापस अर्जित किया और प्रभु के भक्‍त बन गये । चरित्र पतन की पराकाष्‍ठा से प्रभु का एक नाम (वह भी अपने पुत्र को पुकारने हेतु लिया गया) अंतिम समय में उनका कैसे उत्‍थान करता है, यह स्‍पष्‍ट देखने को मिलता है । इससे स्‍पष्‍ट होता है कि चरित्र की चाबी भी प्रभु के हाथ में है ।


इसलिए जीवन में सब कुछ खो भी जाये पर प्रभु को मत खोयें - हरि ना बिसारिये । प्रभु जीवन में हैं तो जैसे एक जादूगर पलभर में गेंद से फुलों की झड़ी बना देता है वैसे ही प्रभु हमें शुन्‍य से शिखर पर ले जाते हैं ।


प्रभु से बड़ा जादूगर कौन है । ब्रह्माण्‍ड को विज्ञान की आँखों से देखेंगे तो तर्क और सिद्धांतों में उलझ जायेंगे पर ब्रह्माण्‍ड को एक भक्‍त की आँखों से देखेंगे तो प्रभु के जादू का स्‍पष्‍ट दर्शन होगा । महासागर, आकाश, नक्षत्र, पर्वत, तारे, भूमंडल सब प्रभु के जादू का दर्शन कराते हैं जिन्‍हें आध्यात्म में प्रभु का ऐश्‍वर्य कहा गया है । सभी लय में स्थित हैं, सभी मर्यादा में रहते हैं, यह उस श्रेष्‍ठत्‍तम जादूगर के जादू की एक छोटी सी झलक मात्र है ।


प्रभु को जीवन में रखें तो प्रभु का जादू जीवन में काम करेगा । इसलिए जीवन में कुछ भी चला जाये, सब कुछ जाने देना पर प्रभु जाने लगे तो प्रभु को रोक लेना । प्रभु को रोक लिया तो सब कुछ बिन बुलाये वापस आ जायेंगे । प्रभु कैसे रूकेगें जीवन में - गलती होने पर पश्चाताप के दो सच्‍चे आंसु और जीवन में वह गलती (जिस कारण प्रभु हमसे दूर जा रहे थे) को जीवन पर्यन्त नहीं दोहराने का सच्‍चा संकल्‍प । साथ ही प्रभु की भक्ति जिस कारण प्रभु हमसे कभी दूर नहीं होगें ।


इसलिए जीवन में प्रभु भक्ति को लाना चाहिए जिससे हम जीवन में प्रभु को कभी न खोयें ।


धन्यवाद ज्ञापन

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